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सोमवार, 29 जून 2020

एक तरफ चकाचौंध जिंदगी दूसरी तरफ 80 करोड़ भारतीय गरीबी में जीने को मजबूर

 विश्वपति वर्मा(सौरभ)

देश सोने की चिडिया थी और देश मे अनंत खजाना था लेकिन विदेशी लुटेरों के चलते देशवासियों को आर्थिक समस्या का सामना करना पडा लेकिन आजादी के बाद भारत में लोकतंत्र बहाल होने के बाद देश को विदेशी लुटेरों से ज्यादा स्वदेशी लुटेरों ने लूटना शुरू कर दिया जिसका परिणाम है कि 21वीं सदी के दौर में भी देश में गरीबी ,बेरोजगारी ,भुखमरी और कुपोषण पर कोई नियंत्रण नहीं पाया जा सका ।
 आज देश में 20 प्रतिशत लोगों के पास देश कि 80 प्रतिशत सम्पत्ति केन्द्रित है जबकि देश की 80 प्रतिशत जनता के पास मात्र 20 प्रतिशत धन है भारत में अति उच्च सम्पत्तिधारी कुबेरों की संख्या 800 है जिनकी कुल सम्पत्ति 945 अरब डालर है इनमें धन कुबेर ऐसे है जिनकी प्रत्येक की सम्पत्ति 50 अरब से अधिक है

लोक सभा में 475 करोड़पति सांसद है. और यही लोग हैं जो अपने हितों और स्वार्थो को ध्यान में रखकर नीतियाँ बनाते बिगाड़ते रहते है इसीलिए देश में आर्थिक विषमता गहराती जा रही है, जिस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है, जिस काले धन को कानून बना कर लाने की बात हो रही थी उस कालेधन को वही कानून निर्माता ही दबा कर बैठे हुये हैं जो कि गरीबी निवारण के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा बन गई है. लिहाजा 6 साल बीत जाने के बाद भी काला धन लाने की बात मात्र जुमला बन कर रह गई ।

सरकार द्वारा गरीबी निवारण हेतु अनेक कार्यक्रम चलाए गए हैं किन्तु इनका पूरा लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच पाता है आजादी के बाद से  गरीबी निवारण हेतु देश में हजारो करोड़ रूपया पानी की तरहं बहा दिया गया  जिसमे 
 ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय  सामाजिक सहायता योजना, राष्ट्रीय  वृद्धा पेंशन योजना, राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना, राष्ट्रीय प्रसव लाभ योजना, शिक्षा सहयोग योजना, सामूहिक जीवन बिमा योजना ,जयप्रकाश नारायण रोजगार गारंटी योजना , बालिका संरक्षण योजना, सार्वजानिक वितरण प्रणाली , विकलांग संगम योजना, जन श्री बीमा योजना , विजन 2020 फाँर इण्डिया, लक्षित सार्वजानिक वितरण प्रणाली , प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना, सर्वप्रिय योजना, अन्त्योदय अन्न योजना, राजीव गाँधी श्रमिक कल्याण योजना , वाल्मीकि अम्बेडकर आवास योजन , राजीव गाँधी श्रमिक कल्याण योजना, जननी सुरक्षा योजना, भारत निर्माण कार्यक्रम, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना , इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना 2009, 20 सूत्रीय कार्यक्रम 2007, जवाहर ग्राम सामृध्य योजना , महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम सहित वर्तमान केंद्र सरकार की लगभग एक दर्जन से अधिक योजनायें शामिल है।
 
सवाल यह है कि देश के खाजाने से इतना पैंसा खर्च करने के बाद भी देश के अंदर गरीबी कम क्यों नही हुई ? आखिर 80 करोड़ से अधिक आबादी को आज भी राशन की दुकान से अनाज क्यों दिया जा रहा है? क्या बीच में 80 करोड़ से अधिक लोग  गरीबी  काटने के लिए मजबूर हैं ? ऐसे सवालों के बीच साफ जाहिर होता है कि योजना मे खर्च होने वाले धन को जिम्मेदार लोगों द्वारा दबा लिया गया इसका प्रणाम कहा कि गरीब 70 साल पहले जहां पर खड़ा था आज भी वहीं पर खड़ा दिखाई दे रहा है।



 

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