रक्षाबंधन: नोएडा के चार भाई-बहनों की 'खास' कहानियां - तहक़ीकात समाचार

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रविवार, 26 अगस्त 2018

रक्षाबंधन: नोएडा के चार भाई-बहनों की 'खास' कहानियां



नोएडा 

'दुनिया की हर खुशी तुझे दिलाऊंगा मैं, अपने भाई होने का फर्ज निभाऊंगा मैं'। अपनी बहन के लिए हर भाई की यही चाहत होती है। बहन भी भाई से ऐसी ही उम्मीद करती है। आज रक्षाबंधन है। बहनें अपने भाई को राखी बांधकर रक्षा का वचन लेती हैं। भाई भी इस वचन का मान रखते हुए हर मोड़ पर बहन का साथ देते हैं। शहर में कुछ ऐसे भाई हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात में बहनों का हाथ नहीं छोड़ा। उन्हें सहारे की जरूरत पड़ी तो ढाल बनकर सामने खड़े हो गए। 

भाई ने दी जिंदगी 

बहनें अपने भाई को रक्षासूत्र बांधने के साथ वक्त आने पर उनकी रक्षा भी करती हैं। सेक्टर-62 के फोर्टिस अस्पताल में पिछले साल ऐसा ही एक मामला सामने आया था। प्रतापगढ़ के रहने वाले राजेश कुमार की दोनों किडनी फेल हो गई थीं। उनकी हालत लगातार खराब हो रही थी। ऐसे में राजेश की बहन पूनम श्रीवास्तव ने उन्हें एक किडनी दी। राजेश का कहना है कि इसके लिए मैं हमेशा अपनी बहन का आभारी रहूंगा। हर साल रक्षाबंधन पर मैं बहन से जरूर मिलता हूं। 

सृजन के साथ मायशा का रक्षाबंधन


सेक्टर-61 के सल्तनत खान की 14 साल की बेटी मायशा के दो भाई हैं। अफराज और सृजन त्यागी। अफराज मायशा के सगे भाई हैं और सृजन से उनका राखी का रिश्ता है। यह नाता धर्म के बंधनों से परे है। मायशा अफराज के साथ-साथ हर साल सृजन को भी राखी बांधती हैं। यह सिलसिला स्कूल में राखी बांधने से शुरू हुआ। इसके बाद मायशा के मन में इस त्योहार को मनाने की इच्छा जागी। सृजन मायशा के साथ ही डीपीएस में पढ़ते हैं। 

प्लेटलेट्स का किसी तरह किया इंतजाम 

2006 में सेक्टर-25 में रहने वाली अलका के शरीर में प्लेटलेट्स कम हो गए थे। उनका ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव है। इस वजह से कहीं से प्लेटलेट्स का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। उनकी हालत गंभीर होते देख भाई अरुण ने हर जगह संपर्क करना शुरू किया। वह अपने ऑफिस में काम करने वाले हर व्यक्ति तक पहुंचे और ओ निगेटिव ग्रुप के ब्लड का इंतजाम कराया। अलका कहती हैं कि भाई की वजह से ही उन्हें नया जीवन मिला है।

बहनें भी करती हैं रक्षा 

सेक्टर-11 में रहने वाली अंजना 2014 में दिल्ली के मयूर विहार में रहती थीं। अंजना का कहना है कि बिना नोटिस दिए एमसीडी ने उनका घर तोड़ दिया। परिवार उस समय वहां मौजूद नहीं था। वह लौटीं तो घर टूटा मिला। उनका सब कुछ खत्म-सा हो गया था। मेरे भाई ने पूरी कानूनी प्रक्रिया में साथ दिया और अगले हफ्ते से ही घर दोबारा बनवाना शुरू किया और पूरा मकान तैयार करवाया। मेरे लिए यह रक्षाबंधन बहुत खास और यादगार है। 


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