यूपी विधानसभा चुनाव के बाद होंगे ग्राम पंचायत चुनाव!

यूपी विधानसभा चुनाव के बाद होंगे ग्राम पंचायत चुनाव!

पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में देरी से बढ़ा इंतजार, अभी 53 जिलों का सर्वे अधूरा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिए गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में देरी के कारण पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराना मुश्किल माना जा रहा है। आयोग के सूत्रों के अनुसार दिसंबर से पहले रिपोर्ट सौंपना संभव नहीं दिख रहा है। वहीं, अब तक प्रदेश के केवल 22 जिलों में ही सर्वे का काम पूरा हो पाया है।
मई 2026 में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होना बेहद महत्वपूर्ण है। आयोग को जिलों में पिछड़े वर्ग की आबादी और संबंधित आंकड़ों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देनी है।

सूत्रों के मुताबिक आयोग को प्रदेश के सभी 75 जिलों में सर्वे और आंकड़ों का परीक्षण करना है, लेकिन अभी तक करीब 22 जिलों में ही यह प्रक्रिया पूरी हो सकी है। शेष जिलों में सर्वे पूरा होने, आंकड़ों के परीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने में समय लग सकता है। ऐसे में नवंबर-दिसंबर तक आयोग की रिपोर्ट आने की संभावना जताई जा रही है।

पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद भी पंचायत चुनाव कराने से पहले आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके तहत आरक्षण सूची तैयार होने, आपत्तियां मांगे जाने और उनका निस्तारण किए जाने जैसी प्रक्रियाएं होंगी। इस पूरी कवायद में भी समय लगना तय माना जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आयोग की रिपोर्ट दिसंबर तक आती है तो उसके बाद पंचायत चुनाव की तैयारियां कब तक पूरी होंगी। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया भी इसी अवधि के बाद शुरू होने की संभावना है। चुनावी कार्यक्रम, आचार संहिता और प्रशासनिक मशीनरी के व्यस्त होने के कारण पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराना मुश्किल माना जा रहा है।

हालिया रिपोर्टों में भी यही संभावना सामने आई है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर में आने की संभावना है और इसके बाद विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पंचायत चुनाव जून-जुलाई 2027 तक खिंच सकते हैं।

यदि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होते हैं तो वर्तमान में प्रशासक के रूप में काम कर रहे ग्राम प्रधानों की व्यवस्था आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय शासन और संबंधित संवैधानिक/कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

फिलहाल पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा पिछड़ा वर्ग सर्वे और आरक्षण प्रक्रिया है। 22 जिलों में सर्वे पूरा होने और 53 जिलों की प्रक्रिया बाकी होने के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि गांवों की नई सरकार के लिए ग्रामीणों को अभी और कितना इंतजार करना पड़ेगा।
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