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गुरुवार, 3 सितंबर 2020

यूपी-बस्ती का रैपुरा कांड जहां तिलक समारोह में विषाक्त भोजन करने से हुई थी 80 लोगों की मौत

विश्वपति वर्मा(सौरभ)

रैपुरा जंगल कांड बस्ती
Raipura Jungal Case Basti

बस्ती - 15 अप्रैल 1990 को रविवार का दिन था राजधानी लखनऊ से 205 किलोमीटर दूर बस्ती जनपद के रैपुरा जंगल गांव में श्रीपति के बेटे मेवालाल के तिलक समारोह की तैयारी हर्षोल्लास के साथ चल रही थी ,बस्ती जनपद के कटरा से लड़की पक्ष के लोग श्रीपति के घर पहुंचने वाले थे इसके लिए खुद मेवालाल जिनका तिलक होना था अपने सगे संबंधियों के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए नाना प्रकार की व्यवस्था में लगे हुए थे।
गांव के बूढ़े-जवान महिलाएं और बच्चे तिलक समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे थे शाम को 7 बजे थे लड़की पक्ष के लोग भी मेवालाल के घर पहुंच चुके थे जहां उनकी खातिरदारी बड़े ही खुशियों के माहौल में की जा रही थी।

भारतीय परंपरा के अनुसार ऐसे किसी भी शादी-निकाह के कार्यक्रम में गांव के आसपास के हितैषियों 
 और रिश्तेदार जनों को आयोजक के घर भोजन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है ,इसी कड़ी में मेवालाल ने भी आसपास के 200 से अधिक लोगों को अपने तिलक समारोह में भोजन करने के लिए आमंत्रित किया था।

रात के आठ बजे थे तिलक की तैयारियों के बीच भोजन करने लिए लोग एकत्रित हो चुके थे ,भोजन बनकर तैयार हो चुका था लेकिन यह किसी को नही पता था कि आज का भोजन उसके जिंदगी की आखिरी आहार होगा।

इसी गांव के रामसहाय 30 साल पुरानी घटना को याद करते हुए बताते हैं कि वह आयोजक के घर मौके पर उपस्थित थे और रसोई में भोजन तैयार करवाने के लिए भण्डारियों का सहयोग कर रहे थे।

लोग पंक्ति में बैठ चुके थे पत्तल और गिलास लाइनों में सजाई जा चुकी थी जिसमे खाने के लिए भोजन परोसने का काम भी शुरू हुआ आयोजक के घर शाकाहारी भोजन में दाल, चावल ,पूड़ी सब्जी की व्यवस्था थी जिसे मेहमानों ने ग्रहण करना शुरू किया।

उन्होंने बताया कि खाने के पंक्ति में सैकड़ो लोग बैठे कर भोजन कर रहे थे जिसमें ग्रामवासियों के साथ कटरा और आसपास के इलाकों से आये हुए मेहमान भी शामिल थे , रामसहाय पुरानी घटना को याद करते हुए बताते हैं कि भोजन करने के बाद लोग अपने घरों के लिए रवाना हुए उसके बाद दूसरी पंक्ति में भी भोजन करने के लिए लोग बैठ चुके थे इसी बीच भोजन कर चुके लोग उल्टी -दस्त करते हुए बेहोश होने लगे देखते ही देखते यह संख्या सैकड़ो के पार चली गई ।

रामसहाय बताते हैं कि इस भयावह स्थिति को देखकर पूरा गांव दहशत में आ गया जैसे-तैसे लोगों को अस्पताल पहुंचाने की तैयारी हुई ,जीप और ट्रैक्टर ट्राली पर लाद कर कई दर्जन लोगों को जिला अस्पताल बस्ती पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के चलते समय पर इलाज मिलने में देरी हुआ इसी बीच कई लोगों की मौत की सूचना प्राप्त हुई।

उस मंजर को याद करते हुए राम सहाय ने बताया कि इस घटना की सूचना के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने देर रात डॉक्टरों से आग्रह करते हुए काम करने की अपील किया डॉक्टरों ने भी फौरी तौर पर काम पर लौटने का फैसला लिया लेकिन तब तक अस्पताल के हर कोने में मरणासन्न अवस्था मे सैकड़ो लोग पड़े हुए दिखाई दे रहे थे।

समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के स्रोतों से हमे पता चला कि घटना के दिन यानी रविवार रात्रि तक जिला अस्पताल में 125 लोगों को भर्ती कराया जा चुका था जिसमे अगले दिन सोमवार तक 63 लोगों की मौत हो चुकी थी। इस घटना में अमेरिका की समाचार वेबसाइट लॉस एंजेलिस टाइम्स ने कुल 80 लोगों के मारे जाने की बात कही थी ।

प्रदेश में तत्कालीन जनता दल की सरकार में मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने घटना को संज्ञान में लेकर प्रारंभिक जांच के आदेश दिए थे जिसमें इस बात की पुष्टि हुई थी कि आटा या पूड़ी में फास्फोरस की मात्रा पाई गई थी जो एक जहरीला पदार्थ है।

घटना के बाद पूरे प्रदेश में यह बात आग की तरह फैल चुकी थी कि एक वैवाहिक भोज में खाने में जहर मिलाए जाने के चलते सैकड़ो लोगों की मौत हो गई लेकिन अभी तक यह निष्कर्ष नही निकल पाया कि आखिर भोजन जहरीला कैसे हुआ।

घटना में 8 लोग बनाये गए आरोपी 

इस घटना के बाद वाल्टरगंज थाने में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया जिसमें मेवालाल और उनके 3 भाई रामसागर ,अम्बिका और विजय के साथ गांव के काशीराम ,रामकुमार ,बनारसी और रामसहाय शामिल थे।  

रैपुरा कांड का केस कोर्ट में 21 साल तक चलने के बाद 08 मार्च 2011 को सभी 8 आरोपियों को 7-7 साल की सजा सुनाई गई , हालांकि इस तरह का कोई भी रिपोर्ट अभी तक सामने नही आया कि इस घटना के पीछे किसका हाथ था , यह  आयोजन किसी रंजिश का शिकार हो गया या कोई राजनीतिक षणयंत्र था , खाने में जहरीला पदार्थ मिलाया गया था या किसी अन्य कारणों से भोजन जहरीला हुआ था इन सब सवालों का जवाब अतीत के लम्हों में दफन हो गया।



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