गैस संकट से बढ़ी मुश्किलें: मजदूरों का पलायन तेज, नेता विपक्ष तुषार चौधरी ने सरकार को घेरा
सौरभ वीपी वर्मा | तहकीकात समाचार
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब गुजरात के औद्योगिक इलाकों में स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। एलपीजी गैस की कमी और लगातार बढ़ती कीमतों ने प्रवासी मजदूरों के सामने रोजमर्रा के जीवन का संकट खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी न हो पाने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं, जिससे उद्योगों की रफ्तार भी थमने लगी है।
गुजरात विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता और खेड़ब्रह्मा से विधायक डॉ. तुषार ए. चौधरी ने इस पूरे मामले पर सरकार को घेरते हुए कहा कि हालात बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने सरकार से तत्काल कदम उठाकर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने और कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति पर काबू नहीं पाया गया, तो इसका सीधा असर उद्योग, रोजगार और आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा, जिससे गरीब वर्ग की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
गुजरात के प्रमुख औद्योगिक इलाके पांडेसरा, सचिन सिटी और पलसाना इन दिनों गैस संकट की चपेट में हैं। पिछले कई दिनों से एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बुरी तरह बाधित है। हालात ऐसे हैं कि जहां सिलेंडर मिल भी रहे हैं, वहां खुलेआम कालाबाजारी हो रही है और सरकार का कोई नियंत्रण नही है। लोग दोगुना और तीन गुना ज्यादा दाम देकर एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए मजबूर हैं।
इस संकट ने सबसे ज्यादा मार मजदूर वर्ग पर डाली है। रोज कमाने-खाने वाले श्रमिक अब रोटी पकाने तक के लिए जूझ रहे हैं। स्थिति तब और भयावह हो गई जब कई मकान मालिकों ने लकड़ी या अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी। ऐसे में मजदूरों के सामने सिर्फ घर वापसी का विकल्प बचा है।
नतीजा यह है कि औद्योगिक क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर पलायन ने रफ्तार पकड़ ली है। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर बढ़ती भीड़ इस संकट की गवाही दे रही है। सूरत, जो देश की टेक्सटाइल और वीविंग इंडस्ट्री का अहम केंद्र माना जाता है, अब तालाबंदी की चपेट में है।
गैस, कोयला और केमिकल की बढ़ती कीमतों ने उत्पादन लागत को आसमान पर पहुंचा दिया है। ऊपर से श्रमिकों की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। कई फैक्ट्रियों में कामकाज ठप पड़ने की कगार पर है। उद्योग जगत में यह आशंका गहराने लगी है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो बड़े पैमाने पर यूनिट बंद हो सकती हैं।
उधर महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। एलपीजी, कोयला और अन्य कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर गरीब, मध्यम वर्ग और किसानों पर पड़ रहा है। रसोई से लेकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना अब चुनौती बनता जा रहा है। डॉo तुषार चौधरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह सिर्फ आपूर्ति का संकट है या व्यवस्था की नाकामी ।