देश में गैस संकट का असर: मजदूरों का पलायन तेज, बसंत चौधरी बोले हालात गंभीर
सौरभ वीपी वर्मा
तहकीकात समाचार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के असर अब देश के औद्योगिक शहरों तक साफ़ दिखने लगे हैं। देश भर में एलपीजी गैस की भारी किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने हजारों प्रवासी मजदूरों को गांव लौटने पर मजबूर कर दिया है। हालात यह हैं कि खाने-पीने की बुनियादी जरूरतें पूरी न होने से मजदूर बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं, जिससे औद्योगिक उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी बसंत चौधरी ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि“सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर गैस आपूर्ति सुचारु करनी चाहिए। यदि मजदूरों का पलायन नहीं रुका, तो इसका सीधा असर उद्योग, किसानों और आम जनता पर पड़ेगा । जिससे गरीबों की रोजी रोटी पर संकट आ जाएगा।
गुजरात के पांडेसरा, सचिन सिटी और पलसाना औद्योगिक क्षेत्रों में बीते कई दिनों से एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जहां कहीं सिलेंडर मिल भी रहे हैं, वहां कालाबाजारी के चलते कीमत ₹4000 से ₹5000 तक पहुंच चुकी है। मजदूरों के सामने सबसे बड़ी समस्या खाना पकाने की खड़ी हो गई है।
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब कई मकान मालिकों ने लकड़ी या अन्य वैकल्पिक ईंधनों पर खाना बनाने से रोक लगा दी। ऐसे में मजदूरों के पास गांव लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
सूरत की टेक्सटाइल और वीविंग इंडस्ट्री, जो देश की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है, इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। गैस, कोयला और केमिकल के बढ़ते दामों ने उत्पादन लागत बढ़ा दी है, वहीं मजदूरों के पलायन से कई फैक्ट्रियों में काम ठप पड़ गया है। यदि यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर फैक्ट्रियां बंद होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
औद्योगिक इलाकों से हजारों की संख्या में मजदूर अपना सामान समेटकर उत्तर प्रदेश और बिहार के अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भीड़ बढ़ने लगी है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
एलपीजी, कोयला और कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि से महंगाई बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर गरीब, मध्यम वर्ग और किसानों पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है।
इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए बसंत चौधरी ने कहा कि यदि समय रहते गैस आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका गंभीर असर उद्योग, रोजगार और आम जनता की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
अब इसी को अखबार की शैली में अंतिम रूप से तैयार कर दीजिए