एलपीजी संकट से ठेले, गुमटी और ढाबे प्रभावित, बसंत चौधरी ने उठाए सरकार की व्यवस्था पर सवाल

एलपीजी संकट से ठेले, गुमटी और ढाबे प्रभावित, बसंत चौधरी ने उठाए सरकार की व्यवस्था पर सवाल

सौरभ वीपी वर्मा
तहकीकात समाचार

बस्ती। देश में बढ़ती एलपीजी संकट की समस्या को लेकर बस्ती लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बसंत चौधरी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि गैस आपूर्ति की बदहाल व्यवस्था के कारण छोटे कारोबारियों, ढाबा संचालकों और मजदूर वर्ग के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बसंत चौधरी ने कहा कि सरकार ने भले ही घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन के भीतर दूसरा सिलेंडर देने की व्यवस्था लागू करने की बात कही है, लेकिन यह व्यवस्था जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों का रोज़गार ही गैस सिलेंडर पर निर्भर है, उनके लिए सरकार ने क्या इंतज़ाम किया है।

उन्होंने कहा कि ठेला, गुमटी, चाय की दुकान, रेस्टोरेंट और ढाबा चलाने वाले हजारों छोटे कारोबारी हर दिन कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं। वर्तमान व्यवस्था में उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण कई छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे हैं।

बसंत चौधरी ने कहा कि चाय, समोसा और नाश्ते की छोटी दुकानों से लेकर ढाबों तक गैस की कमी का सीधा असर दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर ठेले और गुमटियां बंद होने लगी हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में असंगठित क्षेत्र के मजदूर काम की तलाश में दूसरे शहरों और राज्यों में पलायन करते हैं। वहां उनके पास अपना गैस कनेक्शन नहीं होता, इसलिए वे फैक्ट्रियों या स्थानीय बाजार से सिलेंडर लेकर खाना बनाते थे। लेकिन नई व्यवस्था के बाद उन्हें सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है, जिससे उनके सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो गया है।

बसंत चौधरी ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि अगर गैस की आपूर्ति व्यवस्था इतनी ही कमजोर है तो बंद हो रहे ठेले, ढाबे और छोटे व्यवसायों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल एलपीजी वितरण व्यवस्था में सुधार करे और छोटे व्यापारियों, ढाबा संचालकों तथा प्रवासी मजदूरों के लिए अलग और व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर मंडरा रहा संकट दूर हो सके।
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