वर्ष 2025 : एक साल, कई सबक

वर्ष 2025 : एक साल, कई सबक

सौरभ वीपी वर्मा
संपादक- तहकीकात समाचार

आज 31 दिसंबर 2025 के साथ एक और वर्ष इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। बीते बारह महीने भारत के लिए केवल घटनाओं का क्रम नहीं रहे, बल्कि वे सवाल, चेतावनियाँ और संभावनाएँ भी लेकर आए। राजनीति से लेकर सुरक्षा, आस्था से लेकर आपदा और विकास से लेकर बेरोजगारी तक 2025 ने देश के सामने कई आईने रखे।
राजनीतिक दृष्टि से यह साल बेहद हलचल भरा रहा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन ने यह साफ कर दिया कि शहरी राजनीति में मतदाता अब केवल नारों से संतुष्ट नहीं है। वहीं बिहार विधानसभा चुनाव ने राष्ट्रीय राजनीति को स्पष्ट संकेत दिया कि गठबंधन की मजबूती और सामाजिक समीकरण अब भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पूरे वर्ष केंद्र-राज्य संबंध, विपक्ष की भूमिका और आगामी चुनावों की रणनीति चर्चा के केंद्र में रही।

सुरक्षा के मोर्चे पर 2025 ने देश को झकझोरने वाली घटनाएँ दीं। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई, इस घटना ने एक बार फिर आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को उजागर किया। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली हमले में सुरक्षाकर्मियों की शहादत ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए हमारी रणनीति को नए सिरे से सोचने की जरूरत नहीं है। दिल्ली समेत कई शहरों में संदिग्ध गतिविधियों ने प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने पर मजबूर किया।

आस्था और प्रशासन के टकराव का सबसे बड़ा उदाहरण प्रयागराज महा-कुंभ रहा। करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बनाया, लेकिन 29 जनवरी को बैरिकेडिंग टूटने और भगदड़ में  37 लोगों की मौत ने व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया। यह हादसा याद दिलाता है कि श्रद्धा के आयोजनों में भीड़ प्रबंधन कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन-मरण का प्रश्न है।

प्राकृतिक आपदाओं ने भी 2025 में देश को चैन से नहीं बैठने दिया। मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव, चक्रवात और भारी बारिश ने कई राज्यों में तबाही मचाई। बिहार और पंजाब में अरबों रुपये का नुकसान हुआ। जलवायु परिवर्तन अब केवल बहस का विषय नहीं रहा, बल्कि आम जनजीवन की कड़वी सच्चाई बन चुका है।

वर्ष की सबसे भयावह त्रासदी अहमदाबाद विमान हादसा रहा। 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट टेकऑफ के मात्र 32 सेकंड बाद क्रैश हो गई। विमान में सवार 242 यात्रियों में से 241 की मौत हो गई साथ ही इस दुर्घटना से कुल 275 लोगों की जान जाने की घटना ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया। यह हादसा विमानन सुरक्षा, आपातकालीन व्यवस्थाओं और जवाबदेही पर गंभीर सवाल छोड़ गया।

 वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत ने विकास दर बनाए रखने का प्रयास किया। जीएसटी सुधार, बुनियादी ढांचा और डिजिटल इंडिया जैसे कदमों पर काम आगे बढ़ा, लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि बेरोजगारी, महंगाई और आम आदमी की कमजोर होती आर्थिक स्थिति पूरे साल चिंता का विषय बनी रही। आर्थिक विकेंद्रीकरण और रोजगार सृजन को लेकर कोई ठोस दिशा नजर नहीं आई।
इसके बावजूद खेल, फिल्म और वेब सीरीज के क्षेत्र में भारत ने सकारात्मक छवि बनाई। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और मनोरंजन उद्योग के नए प्रयोगों ने देश को कुछ सुकून के पल दिए।

कुल मिलाकर वर्ष 2025 न पूरी तरह निराशा का साल रहा, न ही पूर्ण उपलब्धियों का। यह साल चेतावनी भी है और सीख भी। आस्था, सुरक्षा, प्रशासन और अर्थव्यवस्था—हर मोर्चे पर आत्ममंथन की जरूरत साफ दिखी। अब निगाहें 2026 पर टिकी हैं, इस उम्मीद के साथ कि नया साल केवल नए वादे नहीं, बल्कि ठोस समाधान और भरोसेमंद शासन लेकर आएगा।
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