शोषित वंचित लोगों को यदि सम्मान और स्वाभिमान से जिंदगी जीना है तो निजीकरण का विरोध करना होगा

भारतीय जनता पार्टी ने निजीकरण का बढ़ावा देकर  देश और प्रदेश के नागरिकों के साथ धोखा किया है । निजी करण बहुत छोटी बात नहीं है क्योंकि निजी करण से यह देश सीमित भर लोगों के हाथों में बिक जाएगा और इस देश के नागरिक मुट्ठी भर लोगों के गुलाम बन कर रह जाएंगे जैसे कि 75 वर्ष पूर्व इस देश के लोगों ने देखा है । 
निजी करण देश को चंद प्रजापति औद्योगिक घरानों का गुलाम बनाने का बहुत बड़ी साजिश है , निजी करण को बहुत से पढ़े लिखे लोग हल्के में ले रहे हैं यह गुलामी का शिकंजा है जो धीरे-धीरे आपके गले को कसता ही जाएगा । सरकारी उपक्रम या सरकारी संस्थान के निजीकरण होने पर आम जनता का चुप रहना एक दिन पूरे देश को भारी पड़ेगा क्योंकि जब सारी स्कूल , सारे अस्पताल , सारे रेलवे स्टेशन , हवाई अड्डे ,बिजली , पानी , सड़क सब प्राइवेट हाथों में होगा तो आप देखेंगे कि तानाशाही क्या होती है ।

सरकार व सरकारी उपक्रमों का उद्देश होता है कम से कम कीमत में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सेवा पहुंचाना जबकि प्राइवेट संस्थानों का उद्देश्य ही होता है कम से कम लागत में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना ।

इसलिए आपको जागना होगा और अपने देश व देश के सामने संपत्तियों को बचाना होगा रेल को बचाना होगा ,सरकारी अस्पताल व शिक्षण संस्थानों को बचाना होगा , एलआईसी  , बीएसएनल , एयर इंडिया और पोस्ट ऑफिस को बचाना होगा , सरकारी कर्मचारियों को सरकारी विभागों को बचाना होगा क्योंकि मुसीबत में सरकारी विभाग ही काम आता है और कोई निजी विभाग काम नहीं आता जिसका उदाहरण आप ने हाल ही में देखा होगा ।

कितने प्राइवेट हॉस्पिटल कोविड-19 में निशुल्क अथवा न्यूनतम दरों पर इलाज कर रहे थे ? कितने प्राइवेट बसें मजदूरों श्रमिकों व छात्रों को ढो? रहे थे कितने प्राइवेट संस्थान व एनजीओ ग्राउंड पर उतरकर जनता की मदद कर रहे थे ?कौन सी प्राइवेट एयरलाइंस को कोरोना काल में भारत वासियों को एअरलिफ्ट कर रही थी ? तालिबानियों के बीच में घुसकर कितने प्राइवेट पायलट ने देशवासियों को निकाला ?सब जगह आपकी जान बचाने के लिए सरकारी संस्थाओं ने काम किया है ।

अतः सभी को निजी करण का विरोध करना चाहिए अन्यथा आने वाले समय में देश को कुछ ही उद्योगपति घराने चलाएंगे और ईस्ट इंडिया कंपनी वाला दौर फिर आ जाएगा । इस बार राजसत्ता हमारे रूप रंग से मिलते जुलते लोगों के हाथों में रहेगी । इसके अलावा राजनीतिक सत्ता मात्र दिखावे भर रह जाएगी । यह तथ्य निजीकरण के दीवाने मूर्ख नहीं समझ पा रहे हैं क्योंकि उनके दिमाग के साथ कुछ लोग खेल रहे हैं , आपके पास आगे अब दो ही रास्ते हैं या तो आप अंबानी अडानी जैसे बड़े उद्योगपति बन जाइए जो कि संभव नहीं है या फिर सार्वजनिक संस्थाओं को अतिक्रमण से बचाने के लिए आगे आइए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग जी सके ।

 किसी पार्टी विशेष की सेवा भक्ति  राष्ट्र सेवा नहीं है ।देश में गरीबी ,भुखमरी , बेरोजगारी ,भ्रष्टाचार का जिम्मेदार चंद पूंजीपति  हैं इस को ध्यान में रखते हुए हम सभी को अपने अपने जगह पर इससे निपटने के लिए रणनीति तैयार करने की जरूरत है । अन्यथा आजादी के साढ़े दशक बीत जाने के बाद भी भारत की जनता मुट्ठी भर लोगों की गुलामी झेलने के लिए सिर झुकाए खड़ी रहेगी । 
इस लिए इस देश के शोषित वंचित लोगों , गरीबों ,बेरोजगारों , पिछड़ों एवं किसानों को यदि सम्मान और स्वाभिमान से जिंदगी जीना है तो निजीकरण का विरोध  करना होगा ।
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