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शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

गरीबों का आशियाना उजाड़ रही सरकार "हैप्पी होम " पर चला बुलडोजर ,बेघर हुए विकलांग

राजधानी लखनऊ के अंदर भीख मांगने वाले 132 लोगों को  उनकी परंपरा से मुक्त कराकर उन्हें रोजगार देकर उनके जीवन मे खुशियां लाने वाले शरद पटेल को आज दुख भी बहुत हुआ ।क्योंकि जिन भिखारियों को वें समाज की मूलाधार में लाकर खड़ा कर रहे थे उनके रहने की ठौर ठिकाने वाली जगह "हैप्पी होम "को नगर निगम ने जेसीबी मशीन लगाकर चंद मिनट में ध्वस्त कर दिया।

आइये जानते हैं शरद पटेल ने क्या लिखा.

आप सभी को अफ़सोस के साथ बताना पड़ रहा है छठ पूजा की जोरों से चल रही तैयारियों की बीच आज लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में बना अस्थाई शेल्टर होम जो ‘हैप्पी होम’ के नाम से बना था आज उसे  बुलडोजर से उजाड़ दिया गया। आज से ये 20-25 लोग कहाँ रहेंगे कहाँ सोयेंगे न उन्हें पता न मुझे। हमारी संस्था के पास कोई बड़ा बजट नहीं है इस ‘हैप्पी होम’ को GOONJ और UnLtd India के सहयोग से बड़ी मुश्किल से जनवरी 2019 में बनाकर खड़ा किया था।

मैं जानता हूँ ये छठ पूजा घाट के पास की जगह है। इस जगह पर शेल्टर होम उन विषम परिस्थितियों में बनाया गया था जब मुझे इन भिक्षुकों को ठहरने के लिय स्थाई शेल्टर होम की अनुमति नहीं मिली थी जिसके लिए फाइलें लेकर मैंने सैकड़ों चक्कर जिम्मेदार विभाग के लगाये थे। लिखित इजाजत नहीं मिली थी केवल मौखिक इजाजत के आधार पर इसे बनाया था जिसका नगर आयुक्त ने उद्घाटन भी किया था। फेसबुक से जुड़े सभी अनुभवी और वरिष्ठ मित्रों से मेरा निवेदन है आपके स्तर से जितना सम्भव हो सके हमें मदद करें जिससे हम इन बेघर हुए साथियों के सोने का इंतजाम हमेशा के लिए जल्द ही कर सकें।

ये ‘हैप्पी होम’ बांस और तिरपाल से भले ही बना हुआ हो लेकिन मेरे साथियों के लिए ये वो आशियाना था जहाँ वो खुशी-खुशी अपना जीवन यापन कर रहे थे। उन्हें पता था चाहें वो सब्जी बेचकर आयें या फिर रिक्शा चलाकर पर रात में उनके सोने के लिए एक ऐसा ठिकाना है जहाँ वो सुकून से सो सकते हैं। सीमित संसाधनों के बीच बहुत मुश्किल और विषम हालातों में पिछले पांच वर्षों से ‘भिक्षावृत्ति मुक्ति अभियान’ इस उद्देश्य से चला रहा हूँ जिससे भिक्षावृत्ति के समापन में अपना योगदान दे सकूं। लखनऊ में 2 अक्टूबर 2014 को ‘भिक्षावृत्ति मुक्ति अभियान’ की शुरुआत की थी। अबतक 132 भिक्षुक भीख माँगना छोड़कर रोजगार से जुड़ गये हैं जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। कई वर्षों तक भीख मांगने वाले ये भिखारी अब किसी के आगे हाथ फैलाकर भीख नहीं मांगते बल्कि अब छोटे-छोटे रोजगार से जुड़ गये हैं। इनका यही वो बदलाव था जिसने मुझे सीमित संसाधनों के बीच काम करने का हौसला दिया।

आज जब इसे अपनी आँखों के सामने उजड़ता हुआ देख रहा था तो ऐसा महसूस कर रहा था जैसे कोई मेरे हौसलों को पस्त कर रहा हो, कोई मुझे चुनौती दे रहा हो कि तुम कहाँ चक्कर में पड़े हो कुछ नहीं कर सकते क्योंकि तुम्हारे पास सत्ता का पावर नहीं है। मैं हमेशा से शुक्रगुजार रहा हूँ मीडिया के उन तमाम साथियों का जिन्होंने मेरे काम की कवरेज बड़े पैमाने पर करके मेरा और मेरे साथियों का उत्साह बढ़ाया है। यही वो ऊर्जा है जिससे मुझे विषम हालातों में लड़ने की ताकत मिलती है। आप सभी से पुन: अनुरोध जितना सम्भव हो सके इस काम को आगे बढ़ाने में हमारा सहयोग करें। आपका सहयोग की हमारे साथियों के बदलाव की ताकत है।

आज की रात और ऐसी न जाने कितनी अनगिनत रातें मेरी मुश्किल भरी कटेंगी जबतक कि मैं इनके रहने का इंतजाम नहीं करा देता। आज दिनभर भटकते हुए जब सब जगह से थक हार गया तब सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात आपसब तक पहुँचाने की कोशिश कर रहा हूँ। उम्मीद है आप हमारे साथियों की पीड़ा को जरुर समझेंगे।

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