मामला सल्टौआ ब्लॉक के ग्राम पंचायत कनेथू बुजुर्ग का है - तहक़ीकात समाचार

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रविवार, 11 नवंबर 2018

मामला सल्टौआ ब्लॉक के ग्राम पंचायत कनेथू बुजुर्ग का है




विश्वपति वर्मा_
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गांव के लोगों को उनके घर के आस पास रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा चाहे जितना भी प्रयत्न कर लिया जाए लेकिन पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार की वजह से कार्ड धारक को काम मिलना छोड़िए ,पंचायत के पैंसे को गबन करने के लिए रोजगार सेवक आंगनबाड़ी पत्नी एवं उनकी बेटियों के साथ पूर्व प्रधान पुत्र एवं कोटेदार के परिवारों  के खाते में मनरेगा का पैंसा डाल दिया गया।

मामला सल्टौआ ब्लॉक के ग्राम पंचायत कनेथू बुजुर्ग का है जंहा पर शुशीला देवी ने अनसूचित जाति के सीट पर चुनाव जीता। जीत तो शुशीला देवी की हुई लेकिन कार्यभार पूर्व प्रधान प्रताप नारायण मिश्रा देखते हैं ,शुशीला ग्राम पंचायत में महज कठपुतली की तरहं है जिसका परिणाम है कि ग्राम पंचायत के धन को मनमर्जी तरीके से खर्च किया जा रहा है।


ग्राम पंचायत के कई जॉबकार्ड धारक द्वारा काम न मिलने की शिकायत पर जब हम गांव में पँहुचे तो गांव के दर्जनों लोगों ने आरोप लगाया कि हम लोगों को काम मांगने के बाद भी मनरेगा पर काम नही मिलता ,इसकी पड़ताल करने के लिए हम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना की वेबसाइट पर गए जंहा से पता चला कि प्रधान और प्रधानप्रतिनिधि के मिलीभगत से विकास कार्य का पैंसा मिट्टी कार्य के नाम पर अपने चहेतों में बांट दिया गया

कमलावती देवी के नाम से बने जॉब कार्ड की जब हमने पड़ताल किया तो पता चला कि वें आंगनबाड़ी हैं ,उनके पति रोजगार सेवक हैं लेकिन कमलावती देवी और उनकी दो बेटियों रीता और अनीता को मनरेगा से 51 बार बिना काम किये लाभ दिया गया ।

प्रताप नारायण जो प्रधान प्रतिनिधि हैं और पूर्व में प्रधान रह चुके हैं इनके बेटे गगन को 19 बार मनरेगा से लाभ दिया गया है ,यंहा एक सवाल यह है कि क्या प्रधान पुत्र मनरेगा में काम करने गया था ,हालांकि वें अब प्रधान नही हैं।

गाँव के एक और निवासी अस्वनी के खाते में मनरेगा का भुगतान किया गया गांव के लोगों ने बताया कि अस्वनी कुमार ने तो कभी किसी प्रकार से मजदूरी नही की ।लेकिन वर्ष 2018 में अस्वनी के खाते में 7000 रुपये का भुगतान किया गया है।

इसी प्रकार जॉब कार्ड धारक हरीशचंद्र के खाते में मनरेगा का पैंसा डाला गया है जिन्होंने कभी मनरेगा में मजदूरी नही की।

ऐसे ही तमाम लोग गांव में हैं जिन्होंने कभी मनरेगा या किसी और के यंहा मजदूरी नही की लेकिन जिम्मेदार लोगों के मिलीभगत से पैंसे का बंदरबांट करने के नियति से बिना काम किये उनके खाते में भुगतान कर दिया गया ।

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