बस्ती-डुमरियागंज मार्ग बना ‘डेथ कॉरिडोर’, 3 साल में 47 हादसे, 33 मौतें और 60 से अधिक घायल
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी बसंत चौधरी ने कहा विभागीय उदासीनता के चलते हो रही दुर्घटना पर शासन-प्रशासन की तय हो जवाबदेही
सौरभ वीपी वर्मा
तहकीकात समाचार/ कुआनो पोस्ट
बस्ती। बस्ती-डुमरियागंज मार्ग पर लगातार हो रहे हादसों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्य की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनवरी 2023 से सितंबर 2026 के बीच घटनाओं के संकलन के अनुसार, इस मार्ग पर कम से कम 47 बड़ी सड़क दुर्घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों में 33 लोगों की मौत हुई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं। रिपोर्टों में दर्ज घटनाओं के आधार पर तैयार किए गए इन आंकड़ों से वास्तविक संख्या अधिक होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मार्ग पर पचमोहनी, महनुआ, मंडफ, असनहरा, महनुआ, सोनहा, औसापुर, तकियाचक, नरायनपुर, मनौरी चौराहा, मधवापुर और बेलहरा समेत कई स्थान दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में सामने आए हैं। इन स्थानों पर लगातार हादसे होने के बावजूद सड़क की स्थिति और यातायात सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मनौरी चौराहा से सिद्धार्थनगर सीमा के दुबौली तक करीब 34 किलोमीटर लंबे मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए मार्च 2025 में करीब 112.32 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई थी। निर्माण कार्य पूरा करने की समय सीमा अगस्त 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन सितंबर 2026 तक भी सड़क का काम पूरा नहीं हो सका है। जिसकी वजह से लगातार सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी है ।
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी एवं श्री कृष्णा मिशन हॉस्पिटल के चेयरमैन बसंत चौधरी ने मार्ग की स्थिति और लगातार हो रहे हादसों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह सड़क निर्माण में देरी हो रही है और जगह-जगह सड़क टूटने के साथ निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है, उसे केवल दुर्घटना कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, विभागीय उदासीनता और निर्माण कार्य में देरी की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बसंत चौधरी ने कहा कि यदि निर्धारित समय में सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा हो जाता और बीच में डिवाइडर सहित आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था कर दी जाती तो आमने-सामने की टक्कर और गलत दिशा से आने वाले वाहनों के कारण होने वाले कई हादसों को रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की देरी की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर नहीं चुकानी चाहिए।
निर्माणाधीन सड़क पर कई जगहों पर सड़क खोदकर छोड़ दिए जाने और गिट्टियां बिखरी होने से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए सड़क पर बिखरी गिट्टियां विशेष रूप से खतरा बनी हुई हैं। सितंबर 2026 में बारिश के बाद कई स्थानों पर गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की स्थिति और खराब हो गई।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर स्थायी सुरक्षा इंतजाम कब किए जाएंगे। सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा होने तक निर्माणाधीन हिस्सों में बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेतक और अन्य सुरक्षा उपायों की आवश्यकता बताई जा रही है।
बसंत चौधरी ने निर्माण एजेंसी और शासन-प्रशासन से सवाल किया है कि सड़क चौड़ीकरण का काम अगस्त 2026 की निर्धारित समय सीमा में पूरा क्यों नहीं हो सका। उनका कहना है कि जिन स्थानों पर सड़क बदहाल और गड्ढायुक्त है, वहां तत्काल मरम्मत क्यों नहीं कराई जा रही है और निर्माणाधीन हिस्सों में राहगीरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक संकेतक, बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर पर्याप्त संख्या में क्यों नहीं लगाए गए हैं।
उन्होंने दुर्घटना संभावित मोड़ों और चौराहों पर डिवाइडर तथा अन्य सुरक्षा इंतजाम पूरे किए जाने की समय सीमा स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही निर्माण कार्य की धीमी गति की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
बस्ती-डुमरियागंज मार्ग क्षेत्र के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण रास्ता है, लेकिन निर्माण में देरी और कई स्थानों पर सड़क की खराब स्थिति के कारण राहगीरों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण की गति बढ़ाने के साथ-साथ परियोजना पूरी होने तक दुर्घटना संभावित स्थानों पर तत्काल सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए।
हाल की बात करें तो बस्ती-डुमरियागंज मार्ग पर प्रमुख जानलेवा हादसों में विजय पाल, जितेंद्र यादव, विजय कुमार, शंभूनाथ गौतम, अश्वनी चतुर्वेदी , रोहित सिंह , सैदुन्निशा , सरताज ,आरती देवी , रकीब अली और अभिषेक उपाध्याय की मौत हुई है ।