मानसून की बेरुखी से सूखे की चपेट में यूपी के 28 जिले

मानसून की बेरुखी से सूखे की चपेट में यूपी के 28 जिले 

पूर्वांचल और मध्य यूपी में हालात गंभीर, धान की फसल प्रभावित खेतों में पड़ने लगीं दरारें

सौरभ वीपी वर्मा
तहकीकात समाचार

उत्तर प्रदेश में मानसून की कमजोर दस्तक ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 1 जून से 31 जुलाई के बीच प्रदेश के 28 जिलों में सामान्य से 25 से 78 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज किए जाने से कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में दिखाई दे रहा है। खेतों में नमी की कमी के कारण धान की रोपाई प्रभावित हुई है, जबकि रोपाई किए गए खेतों में भी फसल सूखने का खतरा मंडरा रहा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रभावित 28 जिलों में 13 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 51 प्रतिशत या उससे भी कम बारिश हुई है। इनमें भदोही (संत रविदास नगर), देवरिया, जौनपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, कुशीनगर, रायबरेली, संत कबीर नगर और सीतापुर समेत अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण खेती के लिए किसानों की बारिश पर निर्भरता और बढ़ गई है।

कम बारिश का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में देखा जा रहा है। प्रयागराज, अंबेडकरनगर, गाजीपुर, आजमगढ़, गोरखपुर, मऊ, बलिया, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, उन्नाव, कानपुर नगर, लखनऊ, अमेठी, फतेहपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र में सामान्य से 25 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।

मानसून की कमी का सीधा असर खरीफ की प्रमुख फसल धान पर पड़ा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई क्षेत्रों में धान की रोपाई समय पर नहीं हो सकी। जिन किसानों ने किसी तरह रोपाई कर ली है, वहां भी खेतों में पानी की कमी के कारण पौधों के पीले पड़ने और फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान के साथ-साथ अन्य खरीफ फसलों पर भी संकट गहरा सकता है। ऐसे में किसान सरकार से राहत उपायों के साथ पर्याप्त बिजली आपूर्ति, ट्यूबवेल से सिंचाई की सुविधा और सिंचाई लागत में राहत की मांग कर रहे हैं।
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