तहकीकात समाचार
बस्ती-रंगकर्म केवल एक कला नहीं, बल्कि मनुष्य को उसकी मानवीयता की ओर ले जाने वाला सशक्त माध्यम है। यह विचार साँचिया के निदेशक कुमार विजय ने बस्ती इकाई द्वारा आयोजित दो दिवसीय नाट्य कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज को आईना दिखाने का कार्य करता है और व्यक्ति के भीतर संवेदनशीलता, संवाद और समझ विकसित करता है। कार्यशाला के माध्यम से युवाओं को अभिनय, अभिव्यक्ति और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रों को संबोधित करते हुए कुमार विजय ने कहा कि वर्तमान समय कला के संक्रमण का दौर है। डिजिटल विकास ने हर व्यक्ति को कला से जोड़ने का अवसर तो दिया है, लेकिन इस आपाधापी में कला का विवेक और उसकी अर्थवत्ता कहीं न कहीं बाजारवाद की ओर झुकती जा रही है।
कार्यक्रम में साँचिया के स्थानीय संयोजक जय प्रकाश चौधरी ने कहा कि समाज में रचनात्मक प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण नहीं मिल पाता, जिसके कारण वे स्तरहीन रचनात्मकता की ओर बढ़ जाते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यशाला बस्ती में हिन्दी रंगकर्म के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी।
कार्यशाला के सह संयोजक दिलीप कुमार यादव ने कहा कि यह पहल युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने के साथ ही उनके बेहतर भविष्य की नींव रखने में सहायक सिद्ध होगी।
इस अवसर पर कप्तानगंज क्षेत्र के अनेक युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे अपने विकास का महत्वपूर्ण अवसर बताया। कार्यशाला में उमेश चौधरी, शिवम वर्मा, अरुण सोनी, विनीत कन्नौजिया, रोहित कुमार, मुकेश चौधरी, विनय कुमार, सचिन यादव, दिलीप पांडे, सुमित चौधरी सहित दर्जनों प्रतिभागी अभिनय की बारीकियां सीख रहे हैं।