धन की कमी से जूझ रही बस्ती की हाईटेक गौशाला, प्रधान और श्रमिकों का टूटा धैर्य

धन की कमी से जूझ रही बस्ती मंडल की हाईटेक गौशाला, प्रधान और श्रमिकों का टूटा धैर्य ,पढ़िए ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट 

सौरभ वीपी वर्मा 
तहकीकात समाचार 

बस्ती- रामनगर विकास खण्ड के ग्राम पंचायत मझारी में स्थित जनपद की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक गौशाला इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। संसाधनों और व्यवस्थाओं के मामले में अग्रणी होने के बावजूद धन की कमी ने इसके संचालन पर बड़ा चुनौती खड़ा कर दिया है।
हरे चारे की उपलब्धता दिखाते बीच में ग्राम पंचायत अधिकारी पप्पू यादव व अन्य।

करीब 40 बीघे क्षेत्रफल में फैली इस विशाल गौशाला में लगभग 10 बीघे में हरा चारा उगाया गया है। मौके पर स्थिति का जायजा लेने पहुंची तहकीकात समाचार की टीम को गौशाला में लगभग 10 कुंटल भूसा, 6 कुंटल पशुआहार दाना, ढाई कुंटल हरा चारा, 70 किलो नमक और 35 किलो गुड़ उपलब्ध मिला। यहां कुल 85 गौवंश संरक्षित हैं, जिनकी देखभाल सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में की जाती है।
गौशाला में कार्यरत श्रमिकों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। देखरेख करने वाली प्रेमा देवी, रीता देवी और बसंत को पिछले 5 महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जबकि भगत को भी एक माह से भुगतान नहीं हुआ है। लगातार बकाया भुगतान के चलते श्रमिकों का मनोबल गिरता जा रहा है, जिससे भविष्य में कामकाज प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
गौशाला के लिए हरे चारे की कटाई करते श्रमिक

गौशाला में स्थायी बिजली कनेक्शन का अभाव है। फिलहाल जनरेटर और सोलर के सहारे काम चलाया जा रहा है, जो न केवल अपर्याप्त है बल्कि महंगा भी साबित हो रहा है। इससे संचालन लागत और बढ़ रही है।
   गौबंश को पीने के लिए पानी की व्यवस्था

ग्राम प्रधान इंद्रावती देवी ने बताया कि यदि समय से मानदेय और अन्य भुगतान नहीं हुआ तो श्रमिक काम छोड़ सकते हैं, जिससे इतनी बड़ी गौशाला का संचालन मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हरे चारे की खेती के लिए जुताई, बुवाई, खाद, बीज और मजदूरी का भुगतान वर्षों से लंबित है। इसके अलावा निर्माण कार्य में लगे लाखों रुपये भी अभी तक नहीं मिले हैं।
   ग्राम पंचायत सचिव पप्पू यादव ने बताया कि यह गौशाला जनपद की सबसे आधुनिक गौशालाओं में से एक है, जहां आवश्यक मशीनें, पर्याप्त हरा चारा और गौवंश के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था उपलब्ध है। इन सुविधाओं के चलते यह गौशाला जिले की टॉप श्रेणी में आती है।
हरा चारा काटने की मशीन और उपलब्ध चारा

गौशाला के संचालन में सहयोग कर रहे प्रधान प्रतिनिधि प्रदीप चौधरी उर्फ मुन्ना चौधरी ने कहा कि जहां अन्य जगहों पर गौशालाओं की बदहाली की खबरें आती हैं, वहीं मझारी की गौशाला एक बेहतर उदाहरण है। बावजूद इसके, धन की कमी, बकाया भुगतान और अन्य ग्राम पंचायतों से मिलने वाली निर्धारित धनराशि का समय से भुगतान न होना इसके संचालन के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है।
       सीसीटीवी की निगरानी में गौशाला

अब सबसे बड़ा सवाल यह है एक ओर जहां सरकार गौवंश संरक्षण और गौशालाओं के विकास पर जोर दे रही है, वहीं जमीनी स्तर पर धनराशि के अभाव और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं इस दिशा में बड़ी बाधा बन रही हैं। मझारी की यह हाईटेक गौशाला आज व्यवस्थाओं के बावजूद आर्थिक संकट से जूझ रही है, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
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