सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर बसंत चौधरी ने कहा“देश बड़ा बोझ उठाने से बचा”

सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर उठा आर्थिक व राजनीतिक सवाल,बसंत चौधरी ने कहा“देश बड़ा बोझ उठाने से बचा”

सौरभ वीपी वर्मा
तहकीकात समाचार 

बस्ती-देश की राजनीति में महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार (परिसीमन) को लेकर विवाद तेज हो गया है। केंद्र सरकार के प्रस्तावित विधेयक पर संसद में सहमति नहीं बन सकी, जिससे यह मुद्दा और गरमा गया है।

इसी बीच उत्तर प्रदेश के बस्ती से पूर्व लोकसभा प्रत्याशी एवं श्री कृष्णा मिशन हॉस्पिटल के चेयरमैन ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव देश पर “अनावश्यक आर्थिक बोझ” डालने वाला था और इसके पीछे राजनीतिक मंशा अधिक नजर आती है।
चेयरमैन ने कहा कि वर्तमान में लोकसभा की 545 सीटें पहले से मौजूद हैं, और महिलाओं को आरक्षण इन्हीं सीटों के भीतर दिया जा सकता था। उनके अनुसार, “पहले से मौजूद सीटों में ही महिलाओं को हिस्सेदारी देना अधिक संतुलित और व्यावहारिक कदम होता।

उन्होंने सांसदों पर होने वाले खर्च का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक सांसद पर होने वाला व्यय काफी अधिक होता है। उनका दावा है कि यदि यही संसाधन स्थानीय स्तर पर खर्च किए जाएं तो “एक ब्लॉक की गरीबी तक खत्म की जा सकती है।” उन्होंने सीटों की संख्या बढ़ाने को गैर-जरूरी खर्च बताया।

चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि वे महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने के पक्षधर हैं, लेकिन सरकार के प्रस्तावित तरीके से सहमत नहीं हैं। उनका सुझाव है कि मौजूदा सीटों में ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए भविष्य में यदि सीटें बढ़ें तो उसी अनुपात में महिलाओं की हिस्सेदारी तय हो।

उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगाया कि यह विधेयक वास्तविक उद्देश्य से अधिक राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया। उनके अनुसार, इसे चुनावी राज्यों  विशेषकर पश्चिम बंगाल में माहौल बनाने के लिए उठाया गया मुद्दा माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही थी जिसमें लोकसभा सीटों को 545 से बढ़ाकर करीब 850 करने और उनमें 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात कही गई थी। हालांकि विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है और इससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि यह कदम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
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