युग परिवर्तन का आह्वान: आधुनिक भारत की ओर निर्णायक कदम- बसंत चौधरी
सौरभ वीपी वर्मा
तहकीकात समाचार
हम 21वीं सदी में हैं युग परिवर्तन का दौर चल रहा है। हम आधुनिक युग में प्रवेश कर चुके हैं, फिर भी यदि देश में ग़रीबी और बेरोज़गारी बनी हुई है तो उसके पीछे हमारी राजनीतिक कार्यप्रणाली और जाति–उच्च-नीच की सोच जिम्मेदार है। यह बात पूर्व लोकसभा प्रत्याशी एवं श्री कृष्णा मिशन हॉस्पिटल के चेयरमैन बसंत चौधरी ने कही।
उनके वक्तव्य ने समकालीन राजनीति, सामाजिक संरचना और विकास की दिशा पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। 21वीं सदी तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का युग है। दुनिया के कई देश शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल क्रांति और उद्योग के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर चुके हैं। भारत भी विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश के बड़े हिस्से में अब भी गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक विषमता कायम है।
बसंत चौधरी का मानना है कि इसका प्रमुख कारण विकास की बजाय वोट बैंक की राजनीति पर अधिक ध्यान देना है। जाति, धर्म और वर्ग आधारित ध्रुवीकरण ने समाज को बांटने का काम किया है। जब राजनीति का केंद्र बिंदु समाज को जोड़ने के बजाय विभाजन हो जाता है, तो वास्तविक मुद्दे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा हाशिए पर चले जाते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में शिक्षा पूरी तरह हाईटेक और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। डिजिटल क्लासरूम, रिसर्च आधारित अध्ययन, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यदि युवा पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा नहीं मिलेगी तो वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।
इसी प्रकार स्वास्थ्य क्षेत्र को भी आधुनिक बनाना समय की मांग है। अत्याधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सक, ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और सस्ती चिकित्सा व्यवस्थाये सब एक विकसित राष्ट्र की पहचान हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश ही वास्तविक सामाजिक न्याय है।
बसंत चौधरी ने पढ़े-लिखे और आधुनिक सोच रखने वाले युवाओं से राजनीति और सामाजिक नेतृत्व में आगे आने का आह्वान किया। उनका मानना है कि नई पीढ़ी में ऊर्जा, दृष्टि और परिवर्तन की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि “बीते युग के प्रतीक बन चुके वे लोग, जो स्वयं को बदलना नहीं चाहते, उन्हें सम्मानपूर्वक रिटायर होना चाहिए ताकि आधुनिक विचारधारा को स्थान मिल सके।
यह बयान केवल राजनीतिक बदलाव का संदेश नहीं है, बल्कि मानसिकता परिवर्तन का भी आह्वान है। जब तक समाज में चरित्रवान, प्रामाणिक और ईमानदार लोगों का चयन नहीं होगा, तब तक विकास की दिशा स्पष्ट नहीं होगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जाति और ऊंच-नीच की सोच को त्यागना होगा। समाज को समरसता, समान अवसर और योग्यता के आधार पर आगे बढ़ाना होगा। यदि निर्णय लेने वाले लोग निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे तो गरीब और वंचित वर्ग तक योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुंचेगा।
सामाजिक न्याय का अर्थ केवल आरक्षण या घोषणाएं नहीं, बल्कि अवसरों की समानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार है।
आज भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एक ओर परंपरागत सोच और पुरानी राजनीतिक शैली है, तो दूसरी ओर आधुनिक, तकनीक आधारित और पारदर्शी शासन प्रणाली की संभावना। उन्होंने कहा यदि देश को वास्तव में गरीबी और बेरोजगारी से मुक्त करना है तो राजनीतिक और सामाजिक सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाना होगा। अब समय है कि युवा आगे आएं, चरित्रवान नेतृत्व का चयन करें और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। तभी 21वीं सदी का भारत केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और आधुनिकता का भी प्रतीक बन सकेगा।