बस्ती- कूड़े के ढेर में सड़ रहा लाखों की लागत से खरीदे गए ट्री गार्ड

बस्ती- कूड़े के ढेर में सड़ रहा लाखों की लागत से खरीदे गए ट्री गार्ड

सौरभ वीपी वर्मा
तहकीकात समाचार

बस्ती- जनपद में पौधों की सुरक्षा के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे ठीक उलट नजर आ रही है। पौधों को संरक्षित करने के उद्देश्य से खरीदे गए ट्री गार्ड आज खुद संरक्षण के अभाव में कूड़े के ढेर में सड़ रहे हैं।
रामनगर रेंज अंतर्गत नारायणपुर गांव के पास सड़क किनारे, वन विभाग के एक कर्मचारी (दफ्तर बाबू जय शंकर प्रसाद) के घर के बगल में खुले में पड़े हजारों ट्री गार्ड विभागीय लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। ये वही ट्री गार्ड हैं, जिन पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च किए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग द्वारा हर वर्ष वृक्षारोपण, ट्री गार्ड, बैरिकेडिंग और पौध संरक्षण के नाम पर भारी-भरकम बजट पास किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक एक ट्री गार्ड की औसत कीमत 800 से 1200 रुपये तक होती है। यदि यहां हजारों ट्री गार्ड पड़े हैं, तो यह लागत सीधे तौर पर कई लाख रुपये में बैठती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले से रखे गए ट्री गार्ड बारिश, धूप और मिट्टी में पड़े-पड़े खराब हो गए। इसके बावजूद पुराने ट्री गार्ड का उपयोग कराने के बजाय नए ट्री गार्ड खरीदकर उसी स्थान पर कूड़े की तरह फेंक दिए गए। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई, बल्कि पौधों की सुरक्षा का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो सका।

वन विभाग हर वर्ष पौधरोपण के दौरान यह दावा करता है कि ट्री गार्ड लगाकर पौधों को सुरक्षित किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि जहां पौधों को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां सुरक्षा उपकरण खुद असुरक्षित पड़े हैं। न तो इन ट्री गार्डों का वितरण हुआ और न ही इन्हें रोपित पौधों पर लगाया गया।

जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के चलते ट्री गार्ड अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। सवाल यह भी उठता है कि क्या इन ट्री गार्डों की खरीद, भंडारण और उपयोग की कभी भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराई गई? यदि कराई गई, तो फिर यह स्थिति कैसे बनी?यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो पौधों के संरक्षण के नाम पर सरकारी धन की यह बर्बादी यूं ही जारी रहेगी।



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