भारत के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में शुमार स्टाम्प पेपर घोटाले ने देश को हिला कर रख दिया था। इस घोटाले का मास्टरमाइंड अब्दुल करीम तेलगी था, जिसने सरकारी सिस्टम की खामियों और अधिकारियों की मिलीभगत का फायदा उठाकर करीब 20 हजार करोड़ रुपये का नेटवर्क खड़ा कर लिया। बताया जाता है कि यह घोटाला 30 हजार करोड़ तक का हो सकता है।
तेलगी का जन्म 29 जुलाई 1961 को कर्नाटक के बेलगाम जिले के खानापुर कस्बे में हुआ था। रेलवे कर्मचारी पिता की मौत के बाद बचपन में ही आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। ट्रेन में फल और सामान बेचकर पढ़ाई का खर्च निकाला और बाद में बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की। नौकरी की तलाश में सात साल तक सऊदी अरब में काम किया और लौटकर अरबियन मेट्रो ट्रैवल्स नाम से कंपनी शुरू की। यहीं से उन्होंने फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेज बनाने का धंधा शुरू किया।
इसके बाद उनकी नजर सरकारी स्टाम्प पेपर पर पड़ी। नासिक के सुरक्षा प्रेस से जुड़ी पुरानी मशीनें और अंदरूनी मिलीभगत के दम पर तेलगी ने असली जैसी गुणवत्ता वाले नकली स्टाम्प पेपर छापना शुरू कर दिया। उन्होंने लगभग 300 एजेंटों का नेटवर्क बनाया, जो इन नकली स्टाम्प पेपरों को बैंकों, बीमा कंपनियों और स्टॉक मार्केट से जुड़े दलालों तक पहुंचाते थे। धीरे-धीरे यह कारोबार 16 राज्यों तक फैल गया।
जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में पुलिस और सरकारी कर्मचारियों तक की संलिप्तता थी। रिश्वत और राजनीतिक संरक्षण के दम पर तेलगी का साम्राज्य वर्षों तक चलता रहा।
2001 में तेलगी को अजमेर से गिरफ्तार किया गया। 2006 में अदालत ने उन्हें 30 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 2007 में 13 साल की अतिरिक्त सजा और 202 करोड़ रुपये जुर्माने का आदेश हुआ। उनकी कई संपत्तियां आयकर विभाग ने जब्त कर लीं।
तेलगी अपनी आलीशान जीवनशैली के लिए भी सुर्खियों में रहे। कहा जाता है कि उन्होंने मुंबई के डांस बार में एक ही रात में करीब 90 लाख रुपये खर्च कर दिए थे। लंबे समय से बीमार रहने के बाद 23 अक्टूबर 2017 को बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
इस घोटाले ने साफ कर दिया कि जब भ्रष्टाचार और व्यवस्था की कमियां साथ मिल जाती हैं, तो एक मामूली आदमी भी अरबों-खरबों का नेटवर्क खड़ा कर सकता है। आज भी तेलगी का स्टाम्प पेपर घोटाला देश की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।