नजरिया- एक जमाने में था कुएं और प्यास का चोली दामन का संबंध ,अब खत्म हो रहा अस्तित्व - तहक़ीकात समाचार

ब्रेकिंग न्यूज़

Post Top Ad

Responsive Ads Here

शुक्रवार, 12 मार्च 2021

नजरिया- एक जमाने में था कुएं और प्यास का चोली दामन का संबंध ,अब खत्म हो रहा अस्तित्व

सौरभ वीपी वर्मा

जब पूरी दुनिया टेक्नोलॉजी और मशीनीकरण के दौर से गुजर रहा है तो इसी दौर में कुएं और प्यास का चोली दामन का सम्बंध भी खत्म होता दिखाई दे रहा है। एक दौर था जब हमारे पूर्वजों को पानी पीने की व्यवस्था के लिए नदियों के बाद कुआं ही सबसे बड़ा स्रोत बन गया था लेकिन आज आलम यह है कि कुओं का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है।
सामाजिक संबंधो के बंधन को कायम किया था कुआं

जीवन के लिए पानी की अनिवार्यता के कारण मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ। कालक्रम में नदियों से होने वाली परेशानियों के कारण लोगों को पानी के अन्य विकल्प की आवश्यकता हुई और इसी आवश्यकता ने एक आविष्कार को जन्म दिया जो कुआं कहलाया। उस जमाने में धरती का सीना चीरकर पानी निकालना आसान नहीं था। कुएं सीमित संख्या में थे। जहां कुएं थे वहीं लोग बसते गये संबंध बढ़ता गया और समाज का निर्माण होता गया।

मानव धर्म शान की बात समझी जाती थी कुएं खुदवाना

कुएं खुदवाना मानव धर्म और शान की बात समझी जाती थी। किसने कितने कुएं खुदवाये सामाजिक प्रतिष्ठा में इसे भी जोड़ा जाता था। कहा जाता है कि कुएं खोदने के लिए मजदूर मजदूरी नहीं लेते थे। उसके बाद भी लोग कहते थे फलाने बाबू ने कुआं खुदवाया है। इस प्रकार लोगों का नाम चलता था जो शान की बात समझी जाती थी।

कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों के आता था काम

कुआं सिर्फ पानी पीने के लिए ही नहीं कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों के काम भी आता था। जिसकी जरूरत आज भी होती है। पूजा-पाठ के लिए कुएं का जल ही पवित्र माना जाता है। शादी-ब्याह के मौकों पर कुएं पर कई प्रकार के विधान निबटाए जाते हैं। गृह प्रवेश और भूमि शुद्धि के लिए कई कुओं का पानी जमा किया जाता है।

कुआं का मिट रहा अस्तित्व

बदलते दौर में कुओं का अस्तित्व समाप्त सा हो गया है। अब कुएं को संरक्षित करने की बात भी कागजों में सीमित रह गया है । कुछ ग्राम पंचायतों में कुएं को बचाने का काम किया गया है लेकिन अधिकांश जगहों पर कुएं उपेक्षित पड़े हुए हैं जो देख रेख की अभाव में कूड़े और मिट्टी के ढेर से पटते चले जा रहे हैं। 

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages