प्रशासन के गलती की सजा मिल रही प्रधानों को, ग्राम पंचायतों का खाता सीज करने का मामला - तहक़ीकात समाचार

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बुधवार, 17 जुलाई 2019

प्रशासन के गलती की सजा मिल रही प्रधानों को, ग्राम पंचायतों का खाता सीज करने का मामला

विश्वपति वर्मा-

जनपद के सल्टौआ ब्लॉक के 83 ग्राम पंचायतों का खाता सीज कर प्रथम खाते से धन निकासी पर रोक लगा दिया गया है।इसकी वजह  गांवों में बने शौचालयों के निर्माण का फोटोग्राफ व यूनिकोडिग के साथ जियो टैग व वित्तीय मासिक योजना पूर्ण न होना बताई गई है।

तत्कालीन जिलाधिकारी डॉo राजशेखर ने 83 ग्राम पंचायतों के खाते को सीज करने का निर्देश एडीओ पंचायत को देकर उसी रात शासन के आदेश पर विदा हो गए वंही अपने मातहतों के निर्देशों का पालन करते हुए एडीओ पंचायत गिरीश सिंह राठौर ने बैंकों और सचिवों को निर्देशित कर दिया कि किसी भी हालत में ग्राम निधि के पैंसे की निकासी न हो पाए।

इस पूरे मामले की हम समीक्षा कर रहे थे तो हमने पाया कि इसमें प्रधान तो मोहरा बना दिये गए असली गलती तो प्रशासन की है जिसमे सबसे बड़ी गलती खुद डीएम राजशेखर ने कर दिया।

दरअसल केंद्र सरकार द्वारा जब पूरे देश के गांवों में शौचालय बनवाने का जोर दिया जा रहा था तब बस्ती में शौचालय का निर्माण काफी धीमी गति से चल रही थी लेकिन लोकसभा चुनाव के मध्यनजर देखते हुए शासन ने अपने सभी कारिंदों को निर्देशित कर दिया था कि चुनाव के पहले स्वच्छ भारत मिशन के तहत 100 फीसदी घरों में शौचालय का निर्माण पूरा होना चाहिए ।

किस जिला अधिकारी की हैंशियत है कि वह सरकार के आदेशों का पालन न करे .हर हाल में जिलाधिकारी को सरकार के आदेशों का पालन करना ही है भले ही सरकारी आंकड़ों में झूठी रिपोर्ट दिखा कर यह बता दिया जाए कि योजना पर काम कर दिया गया है।

बस यही सबसे बड़ी गलती डीएम राजशेखर ने भी कर दिया कि उन्होंने बस्ती में शौचालय के आंकड़े को पूरा करने के लिए तमाम प्रकार के कायदे कानून का मौखिक रूप से निर्माण किया लेकिन धरातल पर शौचालय निर्माण और जियो टैग का काम पूरा नही हो पाया।इस बात की जानकारी खुद डीएम राजशेखर को थी कि धरातल पर शौचालय का काम पूरा नही हो पा रहा है लेकिन शासन के आदेशों पर कोरम पूरा करने के लिए डीएम राजशेखर ने पंचायती राज के जिम्मेदारों को निर्देशित कर दिया कि वेबसाइट और रिपोर्ट में 99 फीसदी  से अधिक शौचालय का निर्माण दिखाया जाए ।लेकिन सच्चाई तो यह है कि जब शौचालय का निर्माण हुआ ही नही है तो फोटोग्राफ और यूनिकोडिंग का कार्य कैसे दिखाई देगा।

इस पूरे मामले में हमने पाया कि इसमें प्रधानों की कोई गलती नही है हर प्रधान यह चाहता था कि शौचालय का काम पूरा हो जाये लेकिन जब गांव की जनता इसमे रुचि नही ले रही थी तो आखिर यह काम कैसे पूरा हो दूसरी तरफ जनता की भी बहुत बड़ी गलती नही थी सरकार के तरफ से 12000  रुपये का सहयोग मिल रहा था जो लोग आर्थिक रूप से ज्यादा परेशान नही थे वह लोग तो 12 हजार लेकर शौचालय बनवा लिए लेकिन जो बेहद गरीब और असहाय परिवार के लोग थे वह 12 हजार में शौचालय कैसे बनवाते लिहाजा आज भी 40 फीसदी से अधिक घरों में शौचालय निर्माण का काम पूरा नही हो पाया है।

रही बात वित्तीय मासिक योजना को पूरा न करने की तो इसमे  सबसे बड़ा दोषी खण्ड विकास अधिकारी है आखिर वह किस बात के लिए ब्लॉक का मुखिया होता है क्या उसे अपने ब्लॉक के ग्राम पंचायतों की संचालित व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत नही है ,क्या उसने इस मामले में कभी ग्राम विकास एवं पंचायत अधिकारी या लेखा जोखा तैयार करने वाले को तलब किया ?शायद नही यदि ऐसा किया गया होता तो आज यह स्थिति नही आती ,सरकारी वेबसाइट प्रिया सॉफ्ट पर सल्टौआ ही नही पूरे जिले भर में लगभग 312 ग्राम पंचायतों का विवरण अभी तक पोर्टल पर दर्ज नही किया गया है अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसमें बड़ी गलती किसकी है ,देखा जाए तो इसमे पूरी गलती प्रशासन की है जिसे ग्राम पंचायत के विकास कार्यों एवं फीडिंग पर ध्यान देना था लेकिन अधिकारियों कर्मचारियों ने आज तक इसे गंभीरता से लिया ही नही .अब आप अपने आप से विचार कीजिये कि इस पूरे मामले में दोषी कौन है जिसका ठीकरा प्रधानों के सिर पर फोड़ दिया गया है ।

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