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बुधवार, 22 मई 2019

बस्ती का प्राइवेट अस्पताल जंहा इलाज के नाम पर मरीजों को किया जाता है ज्यादा बीमार ,ताकि हो सके मोटी कमाई

विश्वपति वर्मा-

प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी से पूरा समाज परिचित है.शहर और कस्बों में नही अब गली -गली में प्राइवेट अस्पतालों का उदय हो रहा है ताकि इनका कारोबार तेजी से फैल सके अब इनके लिए जनता की सेवा का कोई उद्देश्य नहीं रह गया है बस इनका एक ही उद्देश्य है कि इलाज के नाम पर मरीजों के परिवारजनों का जेब जल्दी से जल्दी काट कर अपनी तिजोरी भर लिया जाए
अस्पताल के अंदर की दृश्य जंहा एक बेड पर तीन बच्चों को रखा गया है और उसका फीस 700 प्रति बच्चा चार्ज किया जाता है।

ताजा मामला बस्ती का है जंहा पर रोडवेज के निकट पचपेडिया स्थिति JK Hospital जेके हॉस्पिटल में मरीज के साथ शोषण किये जाने की बात सामने आई है। jk हॉस्पिटल बच्चों के अस्पताल के रूप में जाना जाता है जिसका संचालन डॉक्टर SK गौड़ करते हैं ।इस अस्पताल में इलाज कराने आये कुदरहा ब्लॉक के कोप गांव के निवासी सूर्य प्रकाश ने बताया कि वें अपनी बेटी एंजिल (1 माह)का इलाज कराने के लिए JK हॉस्पिटल में लाये हुए थे।उन्होंने बताया कि एक माह की बेटी को जब अस्पताल में उचित इलाज की जरूरत थी तब उसको 4 दिन में पांच बार विगो लगाया गया उन्होंने बताया कि हर बार विगो लगाने पर 1 माह की बच्ची दर्द से तड़प रही थी लेकिन इलाज करने के नाम पर बच्ची को और बीमार करते जा रहे थे ,एंजिल के परिवार के लोगों ने बताया कि बच्ची को दस्त हो रहा था हॉस्पिटल में जब उसके उचित देखभाल की जरूरत थी तब डॉक्टर ने मोटी फीस की रकम वसूलने के बाद बिना स्वास्थ्य सही हुए बच्ची को घर ले जाने के लिए सलाह दे दिया।

पीड़ित परिवार के लोगों ने बताया कि जब बच्ची को अस्पताल लेकर आये थे तब उसका स्वास्थ्य ज्यादा खराब नही था लेकिन डॉक्टर ने परामर्श के बाद बच्ची को अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दे दिया 4 दिन तक अस्पताल में इलाज चलने के बाद जब बच्ची को ठीक होना था तब वह और बीमार हो गई। उसके बाद अस्पताल में 700 रुपया प्रतिदिन बेड चार्ज, डॉक्टर फीस और दवा इत्यादि के नाम पर बनाई गई मोटी रकम का बिल पकड़ा दिया गया ।

अब यंहा एक सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है कि जब बड़े बड़े अस्पताल मरीज को ठीक भी नही कर पाते तब मोटी मोटी रकम वसूलने के क्या मतलब है?क्या मरीज के परिजनों को कंगाल बनाने के लिये प्राइवेट अस्पतालों का संचालन हो रहा है?क्या जिला प्रशासन को इस काले कारनामे की हकीकत नही मालूम है ?या फिर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार सब कुछ देखकर आंखे बन्द कर बैठे हुए हैं .ऐसे ही तमाम सवाल खड़े होते हैं कि आखिर इलाज के नाम पर जनता का शोषण क्यों किया जा रहा है।

सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था देख कर आम जनता दूर भागती है. यहां के चिकित्सक भी बेलगाम होते हैं और अक्सर समय से अपनी सीट पर मिलते नहीं हैं.क्योंकि सबसे बड़ी बात यह है कि इन सरकारी डॉक्टरों ने अपने निजी अस्पताल जो खोल लिए हैं डॉक्टर SK गौड़ खुद एक सरकारी डॉक्टर हैं जो सरकारी अस्पताल में नही मिलते ऐसे में विवश होकर जनता को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है. लोग पैसे देकर बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर इनके पास जाते हैं लेकिन बेहिसाब खर्च देकर उनका होश उड़ जाना स्वाभाविक है

ऐसी स्थिति को देखने के बाद लगता है कि इन कारपोरेट दलालों और सरकार का चोली दामन का साथ है क्योंकि यह बस्ती का पहला मामला नही है इसके पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जंहा पर निजी अस्पताल नियम कानून का पालन करने में घोर लापरवाही बरतते हैं इलाज के नाम पर उनका पहला उद्देश्य धन कमाना है क्योंकि यह एक लाभकारी बिज़नस हो गया है. मरीज की सेवा और बेहतर इलाज का मुद्दा बाद में आता है।


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