बीमा कंपनी के दावे को चुनौती देने के लिए पीड़ित के वकील जज के सामने झोले में लेकर पंहुचे ट्रक और मोटरसाइकिल - तहक़ीकात समाचार

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गुरुवार, 16 मई 2019

बीमा कंपनी के दावे को चुनौती देने के लिए पीड़ित के वकील जज के सामने झोले में लेकर पंहुचे ट्रक और मोटरसाइकिल

दैनिक भास्कर खबर के अनुसार गुजरात के जूनागढ़ में 3 साल पहले एक सड़क हादसे में पीडब्लूडी विभाग के इंजीनियर और उनके साथी की माैत हाे गई थी। हादसे के बाद मुआवजा देने से बचने के लिए बीमा कंपनी ने कहा कि हादसा मधुमक्खी के काटने से हुआ।

मामले काे कोर्ट में चुनाैती दी गई। यहां पीड़ित पक्ष के वकील ने काेर्ट में ही जज के सामने ट्रक और बाइक के खिलाैने से हादसे का सीन रिक्रिएट कर बताया कि हादसा ट्रक चालक की लापरवाही से हुआ था न कि मधुमक्खी के काटने से। इसके बाद जज ने बीमा कंपनी को मृतक के परिवार को डेढ़ करोड़ चुकाने के निर्देश दिए।

बीमा कंपनी ने मुआवजे देने से किया था इनकार: दरअसल, बीमा कंपनी ने दलील दी थी कि रास्ते में मधुमक्खी का एक झुंड बाइक सवाराें पर टूट पड़ा इसलिए बाइक सवार पिछले चक्के में फंस गए औरउनकी माैत हाे गई। इसके लिए बीमा कंपनी मुआवजा चुकाने की जिम्मेदार नहीं है।

मृतकाें के शरीर पर काटने के निशान नहीं थे :पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि अगर मधुमक्खी काटती ताे मृतकाें के शरीर पर उसके निशान भी हाेने चाहिए थे, जाे कि मौजूद नहीं थे। वकील ने हादसा जज को दिखाने के लिए खिलौने वाले ट्रक और बाइक का इस्तेमाल किया। साथ ही माैके का पंचनामा, बाइक की स्थिति, मृतकाें के शरीर पर चाेट के निशान (मधुमक्खी के काटने के नहीं) की रिपाेर्ट भी दिखाई। जज एनबी पीठवा ने दाेनाें पक्षाें की दलीलें सुनने के बाद मृतक दिलीप के परिजनाें काे 1 कराेड़ 5 लाख रुपए और अरुण के परिजनाें काे 45 लाख रुपए 8 फीसदी ब्याज के साथ ट्रक की बीमा कंपनी काे चुकाने का आदेश दिया।

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