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बुधवार, 2 जनवरी 2019

पाठकों के लिए रचनात्मक लेखन एवं सामाजिकता से भरा होगा 2019

विश्वपति वर्मा_

प्रिय पाठक ,

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँI

हर नया साल, एक ऐसा मौका लेकर आता है,जंहा हम अपने गुज़रे हुए समय के साथ अपने भविष्य को देख सकते हैं ।

मैंने नए वर्ष के प्रथम दिन यानि एक तारीख को कुछ नहीं किया, बस बैठा रहा और 2018 की अपनी उतार-चढ़ाव से भरी ज़िंदगी के बारे में सोचता रहा ।किस तरह से मेरे वर्ष के 12 महीने मौसम की तरहं बदलते हुए खत्म हुए इसकी समीक्षा में दिन भर व्यस्त रहा ।

 जनवरी बस्ती के गांवों में फरवरी राजधानी लखनऊ एवं मार्च राजधानी दिल्ली में बिताने का मौका मिला अप्रैल और मई के महीने में मध्यप्रदेश एवं राजस्थान की यात्रा में रहे वंही जून का महीना तो हमारी शादी का दिन लेकर आ गया ।

ऐसे ही अगले 6 महीने का दिन खट्टी मीठी यादों में समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के बारे में सोचने और उसकी मदद करने में बीत गया ।इस दौरान हमने डाक्यूमेंट्री बनाई ,समाज की दिशा और दशा बदलने के लिए नए नए विचारों का खोज किया , दोस्तों के साथ घूमने टहलने का मौका मिला, होली, दीवाली के त्योहार पर मौज मस्ती हुई आखिर में जैसा कि फिल्मों में देखने को मिलता है हम अपने स्वाभाविक कार्य की तरफ लौट गए ,जो कि सिर्फ लेखन है।

बीता वर्ष मेरे लिए किसी खोज से कम नहीं हैI न सिर्फ़ मैंने नए लोगों, नई जगहों को खोजा, बल्कि यह भी पाया कि हमारे पाठकों को सर्वाधिक क्या पसंद हैI इस लिए हम इस नए वर्ष में कुछ ऐसा कर रहा हूँ जिससे अपने पाठकों के अंदर अपने लेख के प्रति प्रेम जागृत कर सकूँI निराशा, अकेलापन  और विज्ञापनों से जकड़ी हुई इस दुनिया से उनको अलग कर सकूं , इसके अलावां रचनात्मक कार्यों से उनके अंदर जोश भर सकूं ।

मुझे लेखन से बेहतर और कुछ नहीं नज़र आता जो हमें हर परिस्थिति से निजात दिलाने वाला एक मात्र विकल्प है । लेखन न सिर्फ़ लिखने वाले को स्वतंत्र करता है बल्कि पढने वालों को भी आजादी की "फीलिंग" महसूस करवाता है।

हम तो नए वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं वंही हम में से बहुतों के लिए, साल 2018 तभी ख़त्म हो गया था जब घड़ी ने 12 बजाए, लेकिन कुछ के लिए पिछला साल अभी भी एक धारदार तलवार की तरह लटक रहा हैI उनके लिए 2018 बस गुज़रा ही है, लेकिन उसका दुःख अब भी जारी हैI यह साल जिसने उनसे उनके किसी प्रिय को छीन लिया, या उनके सपनों को धूमिल कर दियाI यह कितना हास्यास्पद है, कि हर नया साल हमें एक उम्मीद से भर देता है कि ज़िंदगी हम पर कुछ मेहरबान रहेगी, कि यह साल पिछले साल से ज़रा बेहतर होगाI

लेकिन ज़िंदगी का कोई कैलेंडर नहीं होताI यह अपनी मर्ज़ी से, कभी भी किसी भी समय हमें चकित कर देने वाले ख़ूबसूरत तोहफ़े दे देती है, और फिर कभी कभी हमारी यात्रा को दुखदाई अंत भी दे देती हैI इस सबके बावजूद हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिएI ये ज़िंदगी ही कहाँ होती अगर उम्मीद ना होतीI

साल तो गिनती के होते हैंI इसी में कुछ अच्छे और कुछ बुरे साल भी होते हैंI एक छोटी सी घटना कैसे आपका पूरा साल बर्बाद कर देती हैI सोचिए, उन वर्षों के बारे में जब आपने ख़ूब मज़े किये और उनके बारे में भी जब आपने बड़ी मुश्किलों से वो साल गुज़ारे जैसे कि मेरे साथ बीता ।

जब सितंबर के पहले तारीख को हम मार्ग दुर्घटना की वजह से अस्पताल में भर्ती थे। आप भी  उन पलों के बारे में भी सोचिए, जब लगता था कि अब स्थिति को संभाल पाना असंभव है, लेकिन आप संभाल ले गएI और उन पलों के बारे में भी जब आपको लगता था, कि सब बहुत आसान है लेकिन आख़िर में वो बहुत ही मुश्किल पल साबित हुएI

फिलहाल आप चिंता न करें साल कोई ठहरी हुई चीज़ नहीं होतीI एक मुसाफ़िर की तरह, यह हमेशा सफ़र में रहता हैI एक महीने से दूसरे महीने, एक दिन से दूसरे दिन तक का सफ़र हमेशा जारी रहता हैI हर एक क्षण यह आगे बढ़ता रहता है और हमेशा आपके साथ खुशियों को साझा करने का मौका मिलता रहेगा क्योंकि आपके साथ हम यानी विश्वपति वर्मा हमेशा नए नए विचारों और लेख को प्रस्तुत करते रहेंगे

 हम नए वर्ष में फिर वही कार्य करते रहेंगे जो आपने हमे वर्ष 2010 से करते हुए देखा है यानी कि आप
हमारी लेखनी की दुनिया मे अभी भी बने रहेंगे ,आपको 2019 के सभी दिन में कुछ न कुछ नया और रचनात्मक मिलेगा ।आपके खुशी एवं सामाजिकता के लिए हमने  यंहा थोड़ा बदलाव भी किया है अब हम गांवों की छोटी छोटी समस्या से उठकर राष्ट्रीय समस्या  पर भी लेखनी को धार बनाएंगे।


आशा है, 2019, हमको एक बेहतर लेखक एवं पाठकों के साथ हमे भी एक अच्छा इंसान बनाएगा। आइए, मिलकर इतिहास लिखें।

विश्वपति वर्मा (सौरभ)


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