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रविवार, 2 फ़रवरी 2020

मौजूदा सरकार में बदल गया भ्रष्टाचार का पैमाना, पहले भ्रष्टाचार पर हो रहा था हाहाकार, वर्तमान में चुप्पी

विश्वपति वर्मा-

गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात कहने वाले लोग जब धरातल पर मानव समाज के बड़ी आबादी के लिए प्राथमिकताओं को तय करते हुए काम नही करते तब यह माना जाएगा कि लोग व्यवस्था परिवर्तन के लिए सिंहासन नही चाहते हैं बल्कि सत्ता का हस्तांतरण कर अपने ऐशो इशरत की जिंदगी में चार चांद लगाना चाहते हैं व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर 2014 में सत्ता हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी की भावी नीतियों से बड़ा उदाहरण और क्या मिलेगा।

2014 के पूर्व देश मे कांग्रेस की सरकार रही इस दौरान बड़े से बड़े बजट को डकार लिया गया और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया लेकिन इन सबके बीच कांग्रेस की सरकार में रेल और हवाई यातायात ,सड़क ,विश्वविद्यालय ,अनुसंधान केन्द्र ,स्कूल ,नवोदय ,आश्रम पद्धति विद्यालय ,अस्पताल, रोजगार के लिए मनरेगा ,आरटीआई कानून,आवास ,शौचालय ,बिजली ,पानी जैसे मूलभूत सुविधाओं को प्रदान करने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम किया गया।

फिलहाल देश की जनता के जेहन में यह बात बैठ गई कि कांग्रेस की सरकार में भ्रष्टाचार है लिहाजा 2014 की लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के एक नारे सबका साथ सबका विकास और अच्छे दिनों के सपने दिखाने वाले लॉलीपॉप ने जहां कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया वहीं भारतीय जनता पार्टी को केंद्र की कुर्सी हासिल करने में अपार सफलता हासिल हुआ।

6 साल से भाजपा सत्ता में है क्या फर्क पड़ता है कांग्रेस और भाजपा में ?अंतिम व्यक्ति के जीवन में क्या बदलाव आ गया? शिक्षा की स्थिति का क्या हाल है? गरीबी की परिभाषा क्या है? बेरोजगारी दूर करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए ?भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कौन सा ऐतिहासिक कार्य किया गया? इन सबके सवालों का जवाब खोजेंगे तो आपको जवाब के रूप में केवल एक शब्द में सबकुछ मिल जाएगा कि यहां सब जुमलेबाजी है।

पिछली कांग्रेस की सरकार में जहां भ्रष्टाचार था वहां काम भी दिखाई दे रहा था ,रोजगार की मारामारी अबसे कम रही ,स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार अब से बहुत ज्यादा कम था ,देश के हर राज्य में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर की स्थापना होती रही लेकिन मौजूदा सरकार में तो भ्रष्टाचार का पैमाना ही बदल गया जहां भ्रष्टाचार भी बढ़ गया और काम भी दिखाई नही देता।

डिजिटल इंडिया के बजट का पता नही है ,नमामि गंगे के नाम पर खूब बंदरबांट हुआ ,कृषि अनुसंधान परिषद के बजट को कोई किसान जानता ही नही, कौशल विकास  के नाम पर एक भी ग्रामीण को रोजगार नही मिला, आदर्श ग्राम पंचायत के रूप में समूचे हिंदुस्तान में योजना के तहत एक भी गांव का कायाकल्प नही हुआ, स्वच्छ भारत मिशन के बजट से न जाने कितने कुपोषणग्रस्त स्वस्थ हो गए ,समाज कल्याण की 30 फीसदी योजनाओं का कोई पता ही नही चला, मेक इन इंडिया के नाम पर खूब खैरात बांटा गया लेकिन एक भी इकाई की स्थापना नही हो पाया जहां रोजगार की गारंटी हो,नगर निगम और महानगर में भ्रष्टाचार ने खूब पांव पसारा है ,कोटेदार को राशन में 5 से 7 किलो गेहूं -चावल कम मिल रहा है, एक भी योजना बिना कमीशन दिए नही शुरू हो पा रही है, पेंशन ,आवास और शौचालय की योजनाओं के लिए लोगों को घूस देना पड़ रहा है, सोलर लाइट, स्ट्रीट लाइट, सड़क निर्माण ,भवन निर्माण ,नाला खुदाई के नाम पर तो 50 फीसदी तक कमीशनखोरी हो रहा है ,ग्राम पंचायतों में बिना काम कराए भुगतान हो रहा है ,अस्पतालों में बिना दवा खरीदे भुगतान हो रहा है, स्कूल में दूध ,दही फल वितरण के नाम पर बंदरबांट हो रहा है ,गौशालाओं में बिना जानवरों के भुगतान लिया जा रहा है यानी के पहले से काफी ज्यादा भ्रष्टाचार बढ़ गया लेकिन बीजेपी ने भ्रष्टाचार की परिभाषा ही बदल दिया जहां भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंचने के बाद भी भ्रष्टाचार मुक्त भारत है और अच्छे दिनों के सपने दिखाए जा रहे हैं।

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