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सोमवार, 14 अक्तूबर 2019

बाबा नाम केवलम से गूंंजा गोरखपुर, धर्म महा संमेलन का हुआ समापन

कृपा शंकर -

गोरखपुर।आनंद मार्ग धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन प्रभात फेरी, पांचजन्य एवं योग प्रशिक्षण के बाद सामूहिक प्रभात संगीत, कीर्तन, ध्यान साधना, स्वाध्याय के बाद भारतवर्ष के सैकड़ों जिले से आए हुए, भुक्ति प्रधान एसीबी मेंबर तात्विक आचार्य एवं हजारों साधकों के बीच आनंद मार्ग के जेनरल सेक्रेटरी आचार्य चितस्वरूपानंद अवधूत अपने केंद्रीय समिति के सदस्यों के साथ आनंद मार्ग प्रचारक संघ द्वारा भारतवर्ष में हो रहे सेवा कार्यों की समीक्षा की एवं नए सेवा कार्यों के लिए कार्यक्रम दिए गए ।

 इस उपलक्ष पर एक बैठक हुई जिसमें भारतवर्ष में सामाजिक आर्थिक एवं आध्यात्मिक समस्याओं के समाधान के लिए विचार दिए गए, उसके बाद आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख श्रद्धेय आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत जी का प्रवचन प्रभात संगीत के बाद शुरू हुआ, आज के प्रवचन का विषय है “ ध्यान मूर्ति सद्गुरु” उक्त विषय पर अपना वक्तव्य रखते हुए मार्ग के पुरोधा प्रमुख श्रद्धेय आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने कहा कि जो विषयगत भोगात्मक सुख की अभिलाषा से इस दुनिया में जी रहे हैं सामान्य मनुष्य है, जो वृत्तियों का नियंत्रण करते हुए जी रहे हैं तथा आध्यात्मिक साधना के द्वारा परम पुरुष की ओर आगे बढ़ रहे हैं उन्हें साधक कहा जाएगा।

 सद्गुरु वे हैं जो अलौकिक शक्तियों से संपन्न अपर सीढ़ियों से समन्वित होते हैं उन्हें 'भगवान' या पूर्ण अवतार के श्रेणी में आते हैं बाबा श्री श्री आनंदमूर्ति जी के पास भी था जिसका प्रदर्शन वे जमालपुर मे किया है तंत्र शास्त्र में उन्हें महाकौल कहते हैं स्वयं पूर्ण सिद्ध होने के साथ ही इनमें शिष्यों को भी सिद्ध रखने की क्षमता रखते हैं कालीचरण बनर्जी कमलाकांत महापात्र आदि को अपने जैसा सिद् कर दिया था वे जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं किंतु अपना व्यक्तिगत परिचय छुपा कर रखते हैं उन्होंने कहा कि  मार्ग के प्रारंभिक दिनों में साधकों को प्रशिक्षित करनें के दौरान उन्होंने कहा था कि मुक्ति और मोक्ष तुम लोगों के हाथ में है उन्होंने साधकों को पूछा था तुम लोग क्या चाहते हो मुक्ति मोक्ष लेना या मानव देह मे आकर मानवता की सेवा करना सबों ने कहा था कि वे सेवा करना चाहते हैं आंखों से अश्रु प्रवाहित होता रहा एक बड़े ही विचित्र अतींद्रिय अनिरवणिय परमानंद से सभी आल्हादित होकर आनंदित हो रहे थे, तंत्र में गुरु ही सब कुछ है इसीलिए कहा गया है गुरुर ब्रह्म गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वरः गुरुरेव परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः तारक ब्रह्म जीवों का कल्याण कर  भक्ति प्रदान करते हैं सतगुरु का पार्थिव शरीर तारक ब्रह्म का संकल्प देह होता है। महासंभूति ही तारक ब्रह्म है। और तारक ब्रह्म ही महासंभूति हैं। महासंभूति का शरीर नहीं रहने पर वह पुनः परम चैतन्य के साथ मिल जाते हैं साधकों के लिए सिर्फ आनंदमूर्ति शेष रह जाते हैं एक साधक के लिए तारक ब्रह्म का रूप आवश्यक है इसीलिए कल्याणमय  ब्रह्म कृपा करके मानव देह लेकर आते हैं भक्तों के लिए वह गुरु रूप में मानव देह के माध्यम से करुणामई कृपानिधि के रूप में साधकों का उद्धार करते हैं।

उसके बाद अपराहन 3:00 बजे 48 घंटे का चल रहे “ बाबा नाम केवलम” अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र जो जनमानस के कल्याण के लिए है , आज उसकी समाप्ति हो जाएगी , उसके बाद संध्या 5:00 बजे से सामूहिक प्रभात संगीत ध्यान साधना के उपरांत ( रावा ) रिनासॅस आर्टिस्ट राइटर एसोसिएशन द्वारा प्रस्तुत प्रभात संगीत पर आधारित सांस्कृतिक संध्या का कार्यक्रम होगा , भोपाल गोरखपुर तथा अन्य जगहों से आए हुए कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे , जिस का संचालन भोपाल के श्री नंदेश्वर देव करेंगे।
उक्त जानकारी जन समपर्क सचिव श्री उदयन मुखर्जी  एवं सेक्टोरिल जनसम्पर्क सचिव आचार्य प्रणवेशानंद अवधूत ने दी ।

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