हां देश बदल रहा है! हत्या और रंगदारी के मामले में गिरफ्तार "तड़ीपार" बन गया देश का गृहमंत्री - तहक़ीकात समाचार

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शनिवार, 1 जून 2019

हां देश बदल रहा है! हत्या और रंगदारी के मामले में गिरफ्तार "तड़ीपार" बन गया देश का गृहमंत्री


  1.  देश की शीर्ष अदालत ने तत्कालीन गृहराज्य मंत्री अमित शाह को तड़ीपार बताया था । हत्या, रंगदारी, धमकी जैसे कई मामलों के साजिशकर्ता अमित शाह का आरोपों से पुराना नाता रहा है और अब NDA की दूसरी सरकार में अमित शाह देश के गृह मंत्री बन गए हैं ।


इस बात का संकेत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव के दौरान एक ट्वीट के माध्यम से भी किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था- देशवासियों, वोट देते वक़्त सोचना। अगर मोदी जी दोबारा आ गए तो अमित शाह गृह मंत्री होंगे। जिस देश का गृह मंत्री अमित शाह हो, उस देश का क्या होगा, ये सोच के वोट डालना।

अब सरकार तो प्रधानमंत्री मोदी की बन गई और केजरीवाल के कहे अनुसार गृह मंत्रालय भी अमित शाह को मिल गया। ऐसे में सवाल उठता है की क्या वाकई अमित शाह ऐसे शख्स है जिनपर कई सवाल उठते रहे है। गुजरात में जब वो गृह मंत्री रहे तो कई मामलों में खुद लिप्त हो जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा था।


विवादास्पद शाह गुजरात के गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं। सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में संलिप्त होने के उन पर आरोप लग चुके हैं। साथ ही जज लोया के केस में भी उनका नाम घसीटा जा चुका है। हालाकिं इस केस को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था, अमित शाह को राजनाथ सिंह ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था।

इसके बाद राजनाथ सिंह के गृह मंत्री बनने के बाद उन्हें बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया और अब साल 2019 गृहमंत्री बनाया गया। तमाम विवादों के बावजूद अमित शाह प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते है।

गुजरात में तुलसीराम प्रजापति फर्जी एनकाउंटर केस के मुख्य जांच अधिकारी ने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट को बताया था कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और डीजी वंजारा, दिनेश एमएन और राजकुमार पांडियन जैसे आईपीएस अधिकारी इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता थे।

सोहराबुद्दीन शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति की साल 2006 में गुजरात में एक फर्जी एनकाउंटर में हत्या हुई थी। मोदी सरकार आने के बाद मीडिया ने अमित शाह को ‘चाणक्य’ घोषित कर दिया। भले ही अमित शाह पर कई आरोप हो मगर गृहमंत्री के तौर अमित शाह का अनुभव अच्छा नहीं रहा है।

गुजरात दंगा आरोपी माया कोडनानी के पक्ष कोर्ट में जाकर गवाही देना हो। या फिर मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर के उम्मीदवार बनाए जाने को सत्यागृह बताना।

ये सभी बयान अमित शाह के पक्ष नहीं जाते है। अब क्योंकि शाह एक ज़िम्मेदार पद पर जहां उन्हें बिना भेदभाव किये अपना काम करना ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए की अमित शाह बिना पक्षपात के काम करेंगें। जैसा की उन्होंने कहा था चुनाव के दौरान बयान दिया वो उसे चुनाव में ही पीछे छोड़ दें तो बेहतर होगा।


मसलन हिन्दू और सिखों को छोड़ सबको देश बाहर करने का दावा करने वाले शाह ने कहा   पश्चिम बंगाल के रायगंज में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को ‘‘दीमक’’ कहा था।

उन्होंने कहा था कि केंद्र में यदि भाजपा की सरकार फिर से बनी तो वह इन अवैध प्रवासियों को देश से निकाल बाहर करेगी। उन्होंने असम की तर्ज पर पूरे देश में एनआरसी लागू करने की भी बात कही थी।

गुजरात दंगों पर किताब लिखने वालीं राणा आयूब ने सोशल मीडिया पर लिखा- “जिस आदमी को गुजरात का गृह मंत्री रहते हुए हत्या और रंगदारी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने तड़ीपार घोषित किया था, वह अब भारत का गृह मंत्री है”।

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