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सोमवार, 31 दिसंबर 2018

२०१८ में विश्वभर की महत्वपूर्ण बातें- flashback 2018

वर्ष 2018 हम लोगों से  बिदा लेने को है ।आइये  महत्वपूर्ण घटनाओं पर एक नज़र डालते हैं, जो किसी न किसी रूप में हमारे भविष्य को प्रभावित करेंगी। 
 
विश्वपति वर्मा_

भारत के प्रधानमंत्री वर्ष के शुरुआती दौर में एक प्रभावी नेता रहे हैं लेकिन वर्ष के अंतिम महीने यानी दिसम्बर में तीन राज्यों के चुनाव के हार के बाद धरातल पर उनकी लोकप्रियता में कमी आई है ,हालांकि नरेंद्र मोदी सोशल साइट्स पर आज भी सबसे ताकतवर व्यक्ति हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति लगभग प्रतिदिन सही या गलत कारणों से विश्व के मीडिया में चर्चा का विषय बने रहे। अपने सहयोगी राष्ट्रों के साथ उनकी ठनी रही। अपने अभी तक के कार्यकाल में वे कोई नया मित्र नहीं बना पाए हैं। फिर भी अमेरिकी जनता के एक बड़े हिस्से में ट्रम्प अपनी लोकप्रियता बनाये हुए हैं। वर्ष के अंत में सीरिया और अफगानिस्तान से सेना हटाने का निर्णय लेकर उन्होंने दुनिया को चौंका दिया।  

विश्व राजनीति के परिप्रेक्ष्य में इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण घटना तब हुई, जब उत्तरी कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन अंततः अपने देश से बाहर निकला और उसने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून तथा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प से सिंगापुर में मुलाकात की। इन मुलाकातों के बाद पृथ्वी को परमाणु बमों के अनचाहे धमाकों और दिशा भ्रमित मिसाइलों से थोड़ी राहत मिली। यद्यपि अभी किसी महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं किन्तु फिर भी इस वर्ष दोनों कोरियाई देशों के बीच कटुता में निश्चित ही कमी आई है। 

उधर चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग लगभग ता उम्र के लिए चीन के राष्ट्रपति घोषित कर दिए गए। चीन की सत्ता पर उनका एकाधिकार हो चुका है और आने वाले वर्षों में चीन उनके ही नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। उन्हें चुनौती देने वाला शायद अब कोई नहीं बचा। हमारे पड़ोस में बांग्लादेश की शेख हसीना भी सुर्ख़ियों में रही, जिसने बांग्लादेश का औद्योगीकरण करके देश की अर्थव्यवस्था में आमूल परिवर्तन कर दिया और उसे दुनिया की सबसे तेज गति से भागने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना दिया। 
 
उधर पाकिस्तान की सत्ता पर पुनः सेना का कब्ज़ा क्रिकेटर इमरान खान के माध्यम से हुआ। सेना का सामना करने वाले नवाज़ शरीफ को भ्रष्टाचार के आरोप में कैद की सजा सुना दी गई है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चौपट है और अपने मित्र देशों के सहारे अभी किसी तरह गाड़ी खींच रहा है। 

मध्यपूर्व की बात करें तो  अब्देल फतह अल सीसी का एक बार तो लगभग सफाया हो चुका है और यह क्षेत्र अब शांति की ओर बढ़ता दिख रहा है। इस क्षेत्र की सरकारें थोड़ी स्थिर होने लगी हैं।  मिस्र में राष्ट्रपति सिसी की सरकार दूसरी बार भारी बहुमत से चुन ली गई।  सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान ने सऊदी अरब की परम्परागत सामाजिक व्यवस्थाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन किए और साथ ही युवराज के नेतृत्व में सऊदी अरब अब शत्रु देशों के विरुद्ध अधिक आक्रामक भी दिखने लगा है।
 

पूर्व और सुदूर पूर्व पर नज़र डालें तो मलेशिया की जनता ने अपने एक पुराने लोकप्रिय राजनेता महातिर को 93 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बनाकर दुनिया को चौंका दिया।  आज वे दुनिया के सबसे बड़ी उम्र के राष्ट्राध्यक्ष हैं। जापान के प्रधानमंत्री अबे इस वर्ष पुनः निर्वाचित हुए और अपने देश के सबसे लम्बे समय तक बने रहने वाले प्रधानमंत्री बन गए। उन्हें इस उपलब्धि का श्रेय है कि जापान की अर्थव्यवस्था को नयाजीवन दिया और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से भी अपने संबंधों को सुधारा। 

यूरोप पर नज़र डालें तो इंग्लैंड के नेता पूरे वर्ष यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढते रहे। यह समस्या इतनी उलझ चुकी है कि इसका सीधा समाधान किसी को भी नज़र नहीं आ रहा। जर्मनी की लौह महिला चांसलर एंजेला मर्केल ने 2022 में अपने पद से हट जाने की घोषणा कर दी है और इस तरह यूरोप के एक जुझारू, लोकप्रिय और सम्मानित नेता की बिदाई तय है। जर्मनी में अब परिवर्तन का दौर आरम्भ होगा। वर्ष के अंत में फ्रांस में विभिन्न सामाजिक और आर्थिक कारणों से उपद्रव की शुरुआत हुई। अतः कुल मिलाकर यूरोप के लिए यह वर्ष कुछ विशेष उपलब्धियों वाला नहीं रहा। 

 
 मालदीव की बात करना उचित होगा जहाँ कुछ वर्षो तक भारत विरोधी और चीन समर्थक राष्ट्रपति सत्ता में रहे जिन्होंने अपने निर्णयों से भारत की चिंताएं बढ़ा दी थीं। इस वर्ष सत्ता परिवर्तन हुआ और पुनः भारत समर्थक राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह चुन लिए गए। इस तरह वर्ष 2018 जाते जाते भारत के खाते में एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि डाल कर चला गया।

एक बार फिर भारत पर नजर डालें तो सितंबर में पेट्रोल और डीजल के दाम में भारत में रोजाना बढ़ोतरी होने लगी और देशभर में तेल का दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर चला गया. पेट्रोल मुंबई में 91 रुपये से ज्यादा जबकि दिल्ली में 84 रुपये प्रति लीटर हो गया. इस बीच पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग होने लगी. केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद कर में 1.5 रुपये प्रति लीटर की कटौती और एक रुपये प्रति लीटर की कटौती का भार तेल विपणन कंपनियों को उठाने को कहा.

उधर फ्रांस में ईंधन करों में वृद्धि के खिलाफ 'येलो वेस्ट' प्रदर्शन वर्ष के समाप्ति तक लगातार जारी है। पुलिस ने शनिवार को पेरिस में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। शनिवार को पेरिस में हजारों प्रदर्शकारियों ने सरकारी टीवी स्टेशनों और बीएफएम टीवी चैनल के दफ्तर के बाहर जमा होकर मीडिया पर फर्जी खबरें चलाने का आरोप लगाया और राष्ट्रपति एमेनुएल मैंक्रों का इस्तीफा मांगा। 

22 दिसंबर को 38, 600 प्रदर्शनकारी जमा हुए थे, वहीं प्रदर्शनों के पहले दिन 17 नवंबर को 2,82,000 लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2019 में भी वह विरोध जारी रखेंगे

तहकीकात समाचार (tahkikatsamachar )द्वारा समस्त जानकारी को विश्वसनीय स्रोत से इकट्ठा किया गया है हमारा उद्देश्य है कि पाठकों तक विश्वभर की बड़ी घटनाक्रम को पंहुचायें।

संपादक


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