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बुधवार, 5 दिसंबर 2018

पत्रकारिता का "क ख ग घ" न जानने वाले भी चले हैं समाचार छापने



विश्वपति वर्मा_

देश मे भ्रष्टाचार का बढ़ावा हमेशा उन्ही लोगों द्वारा दिया गया है जिसके अंदर खुद कुछ करने की क्षमता नही है उदाहरण स्वरूप चाहे  पत्रकारिता का क्षेत्र ही क्यों न हो ।

वास्तव में पत्रकारिता का सही मायने माध्यम बनना है इसी के अंग्रेजी शब्द मीडिया के कई सारे स्वरूप देखे जाते हैं जिसमे रेडियो, टीवी चैनल,अखबार ,पत्रिका एवं ब्लॉग शामिल है ,संसाधनों के इसी जरिये से देश और देश के लोगों की अनगिनत समस्याओं और विचारों को लाखों करोड़ों लोगों के बीच मे साझा किया जा रहा है।

इसमे रुचि रखने वाले एक वह लोग हैं जो इस लाइन को अपना प्रोफेशनल लाइफ मानते हुए मीडिया समूहों के लिए काम करते हैं और अपने अलग अलग अन्दाज से जनता और सरकार से जुड़ी पहलुओं को स्टूडियो में बैठ कर दिखाते और सुनाते हैं इसके लिए मीडिया समूहों द्वारा उन्हें श्रमिक भुगतान दिया जाता है।

वंही पत्रकारिता के इस क्षेत्र में एक वह लोग भी हैं जो ग्रामीण इलाकों में तमाम समस्याओं को देखने के बाद उसपर अपनी लेखनी के द्वारा चैनल, अखबार और ब्लॉग के जरिये शासन और प्रशासन से समाधान लाने के लिए  लिखते रहते हैं ,और वास्तव में यही लोग हैं जिनके नाते देश की बहुसंख्यक आबादी के पास सरकार द्वारा चलाई जाने वाली बहुत सारी व्यवस्था धरातल पर पंहुच भी रही है क्योंकि सही मायने में इनकी अपेक्षा "लिमिटेड "होती है क्योंकि ये जीविका के लिए नही बल्कि जीवन के लिए पत्रकारिता करते हैं।

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इस क्षेत्र में कुछ ऐसे भी लोग घुस जाते हैं जिनका उद्देश्य इस लाइन  में आकर केवल और केवल दलाली और चापलूसी करके पैंसा कमाना हैं ,चकाचौंध भरी जिंदगी जीने के लिए लोगों को "ब्लैकमेल" करने के अलावां इनके पास अपनी कोई क्षमता नही होती है ये वह लोग होते हैं जो पत्रकारिता में "क ख ग घ" भी नही जानते लेकिन इस डिजिटल जमाने मे एक वेब पोर्टल बना कर या किसी नामी गिरामी ,चुटपुटिया अखबार में जुड़ कर समाचार छापने के नाम पर अपनी  जीविका चलाते हैं ।और इन्ही लोगों की वजह से आज ग्रामीण इलाकों की पत्रकारिता पर लोगों का भरोसा उठ रहा है।

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