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मंगलवार, 6 नवंबर 2018

कंही ये विश्वयुद्ध का संकेत तो नही

विश्वपति वर्मा_

जब हम ऑक्सफैम की रिपोर्ट पढ़ते हैं तब हमें यह जानकारी होता है कि देश का खजाना महज चन्द लोगों के हाथ मे दिनों दिन जा रहा है रिपोर्ट में बताया गया है कि  73 प्रतिशत संपत्ति पर महज 1 प्रतिशत अमीर लोग काबिज हैं।

दीपावली के पहले जब हम शहर की तरफ पर्व का जायजा लेने गए तो लगा कि इस बार दीपावली फीकी पड़ गई है ।यह जानने के लिए हम और गहराई में गए जंहा पर सीधा जनता से संवाद किया तो पता चला कि लोगों की जेब मे भी पैंसे ही नही है वह दुकानों पर सामानों की खरीददारी कैसे करेंगे।

इस पर अध्ययन करते हुए हम काफी पीछे गए तब हमे पता चला कि विश्व के आधुनिक इतिहास में  सबसे बड़ी और सर्वाधिक महत्व की मंदी 19वीं शताब्दी के चौथे दशक में थी। इस घटना ने पूरी दुनिया में ऐसा कहर मचाया था कि उससे उबरने में कई साल लग गए। उसके बड़े व्यापक आर्थिक व राजनीतिक प्रभाव हुए। इससे फासीवाद बढ़ा और अंतत: 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध की नौबत आ गई।

भले ही हमने द्वितीय विश्वयुद्ध के पैदा होने वाली माहौल को नही देखा लेकिन वर्तमान समय की जो माहौल हम देख रहे हैं इससे देश ही नही बल्कि दुनिया भर की बहुसंख्यक  आबादी गरीबी,बेरोजगारी, हिंसा ,नफरत एवं भ्रष्टाचार को झेल रही है ,वंही जब भारत की बात करें तो यंहा की स्थिति हमे इस ओर इशारा करती है  कि 2021-22 के दौर में एक और विश्वयुद्ध की शुरुआत निश्चित है।

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