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सोमवार, 29 अक्तूबर 2018

मित्रों ...मेरा यह पोस्ट किसी की भावना को आहत पंहुचाने के लिए नही है ,यह सामाजिक निर्धनता एवं गरीब की गतिविधियों को देखते हुए मेरा अपना विचार है

मित्रों ...मेरा यह पोस्ट किसी की भावना को आहत पंहुचाने के लिए नही है ,यह सामाजिक निर्धनता एवं गरीब की गतिविधियों को देखते हुए मेरा अपना विचार है 


विश्वपति वर्मा(सौरभ)

भारत एक ऐसा देश है जंहा से मोहम्मद गजनबी जैसे आक्रमणकारी हजारों हाथी घोड़े पर सोना चांदी लूट कर ले गए उसके बाद भी जंहा पर खनिज पदार्थों की कोई कमी नही ,जंहा पर कच्चे माल की उपलब्धता बहुतायत है वँहा पर गरीबी क्रेडिट सुइस के अनुसार  विश्वभर के शीर्ष स्थान पर है।

जिस भारत मे गेहूं धान, गन्ना ,कपास, आलू ,प्याज ,अरहर, मटर ,मक्का,जौ की अच्छी पैदावार होने की वजह से वह देश अन्नपूर्णा का देश माना जाता है उस देश मे द फ़ूड पॉलिसी की रिपोर्ट के अनुसार 19 करोड़ की आबादी भूखे पेट सोने को मजबूर है।

आप जानते हैं इसका सबसे बड़ा कारण क्या है?आप जानते हैं इस समस्या के लिए जिम्मेदार कौन है ?आप जानते हैं कि देश मे मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए संबिधान में नियम बनाया गया है?शायद हर लोग नही जानते हैं ।

देश को आजाद हुए 71 वर्ष बीत गए हैं और अभी भी देश की 87 फीसदी आबादी सम्पूर्ण भोजन, मूल्य परक शिक्षा,आय के हिसाब से चिकित्सा ,प्रतिभा के अनुसार रोजगार पाने में असमर्थ है लेकिन कोई बड़ा आंदोलन इस विसंगतियों के खिलाफ नही हो पा रहा है ।

इसका सबसे बड़ा कारण है मानसिक गुलामी.... मानसिक गुलामी एक ऐसी व्यवस्था है जिसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए बहुसंख्यक समुदाय में दम नही है क्योंकि मांस और मदिरा के बोतलों पर जयकारा बोलने वाले लोगों की अपनी कोई सोच नही है ।

दूसरे उन्हें जाती और धर्म के नाम पर गुलाम बना दिया गया उन्हें बताया गया कि अल्लाह और राम ही तुम्हारे लिए सर्वोपरि है जबकि सच्चाई यह है कि तुम्हारे किसी भी अच्छे और बुरे दिनों के साथी ये धार्मिक देवता नही हैं।

आज भारत मे स्कूलों से ज्यादा मंदिर बने हुए हैं आज भारत मे यंहा के नागरिक अपने बच्चों को वैज्ञानिक और ज्ञानवर्धक तर्क देने की बजाय उन्हें भगवान और अल्लाह में विश्वास रखने के लिए मजबूर कर रहे हैं जिसका परिणाम है कि आज विश्व की सबसे ज्यादा युवा आबादी वाला देश भारत मानसिक और सामाजिक गुलामी में जकड़ा हुआ है ।

यह तो बेहतर है कि धार्मिक अनुष्ठान के चक्कर मे हिन्दू वर्ग के लोग अपने सामाजिक जीवन मे परिवर्तन लाने के लिए वैज्ञानिक आधार पर काम करने के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन वंही मुस्लिम समुदाय की बहुसंख्यक आबादी धार्मिक महत्व को सर्वोपरि मानते हुए अपने आप को बम जैसे विस्फोटक सामग्री में उड़ने और उड़ाने के लिए तथाकथित लोगों के बहकावे  में आ रहे हैं ।

अतः दोस्तों अपने आप को ,परिवार को, समाज को ,देश को यदि विश्वगुरु बनना देखना चाहते हो तो आज ही धार्मिक भावनाओं से जुड़ी मिथ्या को नकारते हुए विज्ञान द्वारा बनाये गए शिक्षा और सामाजिक जीवन मे अपने आप को समर्पित करने का संकल्प लो अन्यथा आगामी पीढ़ी भी गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कुपोषण ,अज्ञानता झेलने के लिए पीठ झुकाए खड़ी रहेगी।

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