अब गाँव की हर सड़क की होगी डिजिटल पहचान, मिलेगा नाम और यूनिक कोड
तहकीकात समाचार
नई दिल्ली। ग्रामीण सड़क व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। पंचायती राज मंत्रालय ने इंट्रा-विलेज रोड कोडिंग एवं ग्रेडिंग सिस्टम का मसौदा जन परामर्श के लिए जारी किया है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद गाँव की प्रत्येक सड़क को एक विशिष्ट नाम, यूनिक कोड और डिजिटल पहचान प्रदान की जाएगी। इससे ग्रामीण सड़क परिसंपत्तियों का अभिलेखीकरण आसान होगा, उनकी पहचान स्पष्ट होगी तथा विकास कार्यों की निगरानी और रखरखाव में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मंत्रालय ने इस मसौदे पर देशभर के नागरिकों, स्थानीय समुदायों, पंचायती राज संस्थाओं, विषय विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करने, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, डिजिटल मैपिंग तथा आपदा प्रबंधन, डाक सेवा, एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जिससे भविष्य में गाँवों की सड़कें भी शहरी क्षेत्रों की तरह व्यवस्थित पहचान और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ सकेंगी।