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मंगलवार, 8 दिसंबर 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी किसानों के हित में कभी सही निर्णय ले ही नही सकते ,आखिर क्यों?

सौरभ वीपी वर्मा

वक्त आ गया है कि देश के लोग इंकलाब जिंदाबाद का नारा बोलते हुए सड़क से होते हुए सदन की तरफ बढ़ें ,इस देश की तानाशाह सरकार किसानों ,मजदूरों और गरीबों को  गर्त में भेजने के लिए आये दिन नए और बेबुनियाद कानून बनाकर कारपोरेट घरानों को बढ़ाने का काम कर रही है ।

आखिर जब बाबा रामदेव पतंजलि कंपनी का मोहर लगाकर किसानों द्वारा उपजाए गए गेहूं को खरीद कर 45 रुपया किलो का MRP निर्धारित कर आटा बेंच सकते हैं तो उन किसानों को MSP से वंचित क्यों किया जाता है जिन्होंने ठंडी, गर्मी, बरसात में कड़ी मेहनत करके फसलों को पैदा किया है।
यही भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात कर रही थी लेकिन देखने को मिल रहा है कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है और वहीं डीजल के दाम में भी बढ़ोतरी हो रही है परंतु सरकार के पास इस तरह के कोई आंकड़े मौजूद नही है।

 साढ़े तीन सालों में सिर्फ पेट्रोल और डीजल के कर पर 9 लाख करोड़ से ज्यादा फायदा सरकार को हुआ है लेकिन किसानों का एक रुपया केंद्र सरकार ने माफ नहीं किया. वहीं 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण बड़े उद्योगपतियों का माफ कर दिया गया।

इस देश में ललित मोदी, विजय माल्या ,मेहुल चौकसी जैसे लोग कई हजार करोड़ रुपये का लोन लेकर देश से भागकर विदेशों में जाकर व्यवसाय और अय्याशी कर रहे हैं वहीं जब से केंद्र में मोदी सरकार आई तबसे किसानों के आत्महत्या करने के मामले में 45 फीसदी इजाफा हुआ है तो आखिर किसानों के प्रति सरकार का इतना नफरत क्यों है?

सच तो यह है कि जो कहावत कही गई है चोर चोर मौसेरे भाई वह इस सरकार में सटीक बैठता है ,इस देश के शीर्ष कारोबारी गुजराती हैं और साहब भी गुजरात से ही आते हैं जिन्हें फायदा पहुंचाने और अपनी चमक बरकरार रखने के लिए पीएम नरेंद्र दामोदर दास मोदी किसानों के हित में कभी सही निर्णय ले ही नही सकते।

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