मेरी माटी मेरा देश अभियान , महुआ डाबर को नहीं मिला सम्मान, पढ़िए बस्ती की सच्ची कहानी - तहक़ीकात समाचार

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मंगलवार, 15 अगस्त 2023

मेरी माटी मेरा देश अभियान , महुआ डाबर को नहीं मिला सम्मान, पढ़िए बस्ती की सच्ची कहानी

बस्ती : आजादी का अमृत महोत्सव के अन्तर्गत मेरी माटी मेरा देश अभियान अगर वास्तव में देश की स्वतंत्रता और प्रगति के लिए ये अभियान है तो भारत की मिट्टी और शौर्य के एकीकरण को यह दर्शाता है कि यह कार्यक्रम अपनी मिट्टी से जुड़ने, अपने नायकों का सम्मान करने और इस तरह अपने मन में राष्ट्रीय गौरव की भावना भरने का कार्यक्रम है ,जिसके माध्यम से निश्चित रूप से भावी पीढ़ियों को भारत की पोषित विरासत की रक्षा के लिए प्रेरित करेगा।
पिरई खां के वंशज असलम खान उनकी पत्नी और बेटा और पौत्र

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के महुआ डाबर में देश को आजादी दिलाने के लिए क्रांतिवीर पिरई खां के नेतृत्व में उनके गुरिल्ला साथियों ने लाठी-डंडे, तलवार, फरसा, भाला, किर्च आदि लेकर मनोरमा नदी पार कर रहे दमनकारी अंग्रेज अफसरों पर 10 जून, 1857 को धावा बोल दिया गया। जिसमें लेफ्टिनेंट लिंडसे, लेफ्टिनेंट थामस, लेफ्टिनेंट इंगलिश, लेफ्टिनेंट रिची, लेफ्टिनेंट काकल और सार्जेंट एडवर्ड की मौके पर मारे गए। तोपची सार्जेंट बुशर जान बचाकर भागने में सफल रहा। उसने ही घटना की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को दी। इतनी बड़ी क्रांतिकारी घटना से ब्रिटिश सरकार हिल गई थी।
क्रांतिवीर पिरई खां के वंशज आदिल खान अपने लड़ाका पुरखों के बारे में बताते हुए

महुआ डाबर में क्रांतिकारियों के एक्शन से डरी कंपनीराज के कारिंदो द्वारा 20 जून, 1857 को पूरे जिले में मार्शल ला लागू कर दिया गया था। 3 जुलाई, 1857 को बस्ती के कलेक्टर पेपे विलियम्स ने घुड़सवार फौजों की मदद से महुआ डाबर गांव को घेरवा लिया ,घर-बार, खेती-बारी, रोजी-रोजगार सब आग के हवाले कर तहस-नहस कर दिया। महुआ डाबर का नामो निशान मिटवा कर ‘गैरचिरागी’ घोषित कर दिया। यहां पर अंग्रेजों के चंगुल में आए निवासियों के सिर कलम कर दिए गए। इनके शवों के टुकड़े-टुकड़े करके दूर ले जाकर फेंक दिया गया। इतना ही नहीं अंग्रेज अफसरों की हत्या के अपराध में सेनानायक पिरई खां का भेद जानने के लिए गुलाम खान, गुलजार खान पठान, नेहाल खान पठान, घीसा खान पठान व बदलू खान पठान आदि क्रांतिकारियों को 18 फरवरी, 1858 सरेआम फांसी दे दी गई।

 स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी घटना पर जहां पुरात्व विभाग ने महुआ डाबर की खुदाई की वहीं आजाद भारत में आजादी के इतने वर्षों बाद भी समाज एवं सरकारों ने महुआ डाबर में एक अदद स्मारक का निर्माण भी नहीं करा सकी।

आज जब पूरे देश में सरकार आजादी के अमृत महोत्सव का उत्सव मना रही है तब उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के महुआ डाबर की उपेक्षा हास्यप्रद है। 

सरकार के इस अभियान के बीच अमृत महोत्सव और मेरी माटी मेरा देश मुहिम के जरिए क्रांति स्थल महुआ डाबर के लोगों ने मांग की है कि महुआ डाबर क्रांति के महानायकों की स्मृति में बस्ती जनपद में एक भव्य गेट का निर्माण किया जाए , आजादी योद्धाओं की याद में महुआ डाबर में एक गौरवमयी स्मारक, वाचनालय, संग्रहालय, सभागार का निर्माण किया जाए ,आजादी आंदोलन की इस अनोखी घटना महुआ डाबर जन विद्रोह की गौरवशाली विरासत को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ,महुआ डाबर में क्रांतिवीर पिरई खां की प्रतिमा लगाई जाए एवं महुआ डाबर को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ा जाए।

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