आखिर ब्राजील में लगी आग को बुझाने के लिए पूरी दुनिया मे क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन - तहक़ीकात समाचार

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शनिवार, 24 अगस्त 2019

आखिर ब्राजील में लगी आग को बुझाने के लिए पूरी दुनिया मे क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन


 इस समय ब्राजील के वर्षावन में भयानक आग लगी हुई है जिसके कारण दुनिया भर के देश चिंतित हैं क्योंकि ब्राजील के जंगलों को दुनिया के ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत माना जाता है  ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने अमेज़न के वर्षावन में लगी आग को रोकने के लिए सेना की मदद लेने के आदेश दिए हैं. 

राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने एक आदेश जारी करते हुए प्रशासन को सीमाई, आदिवासी और संरक्षित इलाक़ों में सेना तैनात करने को कहा है.

ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने यह घोषणा यूरोपीय नेताओं के दबाव के बाद की है. दरअसल, फ़्रांस और आयरलैंड ने कहा था कि वह ब्राज़ील के साथ तब तक व्यापार सौदे को मंज़ूरी नहीं देंगे जब तक कि वह अमेज़न के जंगलों में लगी आग के लिए कुछ नहीं करता है.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने जलवायु परिवर्तन पर उनसे झूठ कहा है.पर्यावरण समूहों का कहना है कि यह आग बोलसोनारो की नीति से जुड़ी हुई है जिसे उन्होंने ख़ारिज किया है. वहीं, दूसरे यूरोपीय नेताओं ने भी अमेज़न के जंगलों में लगी आग पर चिंता जताई है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस आग को 'दिल तोड़ने वाला बताते हुए कहा है' कि यह 'एक अंतरराष्ट्रीय समस्या' है.उन्होंने कहा, "हम ऐसी हर संभव मदद के लिए तैयार हैं जिससे आग रोकी जा सकती है और जिससे पृथ्वी के सबसे बड़े चमत्कार को बचाया जा सकता है."

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने आग को आपातकालीन स्थिति बताते हुए कहा कि यह सिर्फ़ ब्राज़ील के लिए न केवल चौंकाने वाला और भयंकर है बल्कि यह दूसरे देशों के साथ-साथ दुनिया को भी प्रभावित करेगा.बोलसोनारो ने शुक्रवार को कहा कि वह आग से लड़ने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं और इसके लिए वह सेना को भी उतारने का विचार कर रहे हैं.

हालांकि, उन्होंने मैक्रों पर आरोप लगाया कि वह 'राजनीतिक लाभ' के लिए हस्तक्षेप कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने कहा था कि फ़्रांस में जी-7 सम्मेलन हो रहा है जिसमें ब्राज़ील भाग नहीं ले रहा है और उसमें आग पर चर्चा 'एक अनुपयुक्त औपनिवेशिक मानसिकता' को दिखाता है. पर्यावरण समूहों ने आग से लड़ने की मांग करते हुए शुक्रवार को ब्राज़ील के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन भी किए.

इसके साथ ही लंदन, बर्लिन, मुंबई और पेरिस में ब्राज़ील दूतावास के बाहर कई लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन किए.

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