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बुधवार, 31 अक्तूबर 2018

पंचायत के धन में ब्लॉक अधिकारियों की सेंधमारी ,प्रधानों की हो रही किरकिरी

विश्वपति वर्मा

भारत को समग्र विकास के रूप ले जाने का सपना तो गांधी जी ने ही देखा था लेकिन उनके ग्राम स्वराज की अवधारणा आजादी के 71 वर्ष बाद भी पूरी नही हो पाई क्योंकि देश में विकास कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए बनाए गए प्रखंडो में तैनात ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारी ,सहायक तकनीकी अधिकारी जैसे जिम्मेदार लोगों ने पंचायत के पैंसों में सेंधमारी करना शुरू कर दिया और इसका परिणाम है कि गांव में विकास कार्यों के लिए जारी की गई धनराशि का 50 फीसदी हिस्सा भी उद्देश्य पर  खर्च नही की जाती ।

गांवों में विकास की जिम्मेदारी प्रधान या सरपंच पर है,उनको यह अधिकार मिला हुआ है कि 14 वें वित्त से ग्राम पंचायत में 27 प्रकार की योजनाओं को लागू कर सकते हैं ।लेकिन उसके बावजूद भी ब्लॉक अधिकारी  सब योजनाओं को लागू करवाने के बजाय खड़ंजा उखाड़वाने  लगवाने एवं तालाब सफाई करवाने में ही माहिर हैं क्योंकि इस तरहं के कार्यों में बिना किसी बिरोध के पैंसों का गोलमाल किया जा सकता है ,जबकि गांव की जनता मूलचूल सुबिधाओं के लिए परेशान रहती है ,अभी भी गांवों में पानी निकासी, स्वच्छ पेय जल, साफ सफाई, उजाला, सड़क इत्यादि समस्या बनी हुई है

इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में प्रधानों की मिलीभगत रहती है ,रहे भी क्यों न देश में सरकारी कर्मचारी सांतवें वेतन आयोग का लाभ उठा रहे हैं अधिकारियों को लाखो रुपया सैलरी मिल रही है उसके बाद भी इन्हें पैंसे की जरूरत है तो मनरेगा की मजदूरी से भी कम 3500 भत्ता पाने वाले प्रधान भ्रष्टाचार में लिप्त नही होंगे तो क्या राष्ट्रभक्ति का गीत गाएंगे ।

इस संबंध में हमारी बस्ती जिले के अलग अलग ब्लाकों के दो दर्जन प्रधानों से बात हुई तो उन सभी लोगों का कहना है प्रधान ऐसा जनप्रतिनिधि है जो 24 घंटे जनता के बीच रहता है लेकिन सरकार द्वारा इन्हें किसी प्रकार की सुविधा मुहैया नही कराई गई । जबकि 3500 रुपया से आने-जाने वाले लोगों के चाय पानी और खुद के पेट्रोल का खर्च नहीं निकलता।  प्रधानों ने माना कि सरकारी निरंकुशता और ब्लॉक पर हो रहे भ्रष्टाचार की वजह से ईमानदारी की संभावना  घटी है ।

सदर ब्लॉक के एक प्रधान ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सदन चलाने वाले नेता और लाखों रुपए तनख्वाह लेने वाले जो आईएएस देश का सिस्टम चला रहे हैं, गांवों के लिए दर्जनों तरह की लाखों रुपए की योजनाएं बनाते हैं, क्या उन्हें नहीं पता इतने कम पैसे में प्रधान कैसे काम करता होगा।

गौर ब्लॉक के एक प्रधान ने ब्लॉक की व्यवस्था पर बिगड़ते हुए कहा कि गांव के ही बजट से बीडीओ और पंचायत अधिकारी समेत आधा दर्जन लोग कमीशन लेते हैं ,विरोध करने पर काम नही देते हैं और हर जगह किरकिरी प्रधानों की होती है।

जिले के रुधौली ब्लॉक के एक प्रधान से पंचायत की समस्या और समाधान पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में वें   बताते हैं, “आज जनता के बीच में यह धारणा बन गई है प्रधान पैसा खा गया, प्रधान ने कमीशन लिया, प्रधान ने काम नहीं किया, ऐसे ही ख़बरें मीडिया में भी छापी जाती हैं लेकिन सारे प्रधान बेईमान नहीं हैं। सबका कमीशन तय है, पंचायत के निर्माण कार्यों में ब्लाक का सीधा कमीशन 8 प्रतिशत है, जिसमे 3 प्रतिशत खंड विकास अधिकारी को, ढाई प्रतिशत इंजीनियर और जेई को व ढाई प्रतिशत सहायक विकास अधिकारी पंचायत को जाता है। सात से दस प्रतिशत प्रधान का कमीशन रहता है, जिसमे प्रधान और पंचायत सचिव का आधा-आधा हिस्सा होता है, निर्माण कार्य का लगभग बीस प्रतिशत कमीशन में और फिर ठेकदार को भी बीस से पचीस प्रतिशत की बचत होनी चाहिए इस तरह से निर्माण कार्य का फंड आधा कमिशन में और आधा निर्माण में खर्च होता है।’ वो आगे बताते हैं, “मनरेगा के पक्के कामों में बीडीओ बिना कमीशन लिए काम नहीं करता है, पंचायत सचिव एजेंट की तरह कई जगह काम करता है। कमीशन नहीं दिया तो काम पास ही नहीं होगा, हो गया तो बिल नहीं आएगा, ये काजल की कोठरी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए सरकारी तंत्र ही जिम्मेदार है पंचायत में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए ‘प्रधानों को 5 साल तक 25 हजार रुपए का वेतन मिलने की बात भी कही।

जिम्मेदार लोगों द्वारा भ्रष्टाचार बढ़ाने का यह आलम है कि प्रदेश के 59163 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष प्रदेश भर में 100 गांव भी समग्र एवं समेकित विकास की संरचना को पूरा  नही कर पाए हैं।

बता दें कि  देश में कुल 6 लाख 58 हजार 221 गांव हैं, जिनके विकास के लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय व पंचायती राज मंत्रालय हैं। इसके साथ ही कई दूसरे विभाग भी यहां काम करते हैं। गांवों में खर्च की जाने ली बड़ी धनराशि केंद्र सरकार देती है, जिसे केंद्रीय अंश बाकी राज्य सरकारें देती हैं ।

इसके अलावा सांसद विधायक के कोटे से काम होता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की छह योजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने देश में 2017-18 में 105477.88 करोड़ रुपए का योगदान किया है। एक औसत जनसंख्या (10 हजार ) वाली ग्राम पंचायत को सलाना हर तरह के मद को मिलाकर 15-20 लाख रुपये का बजट आता है। लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद न तो गांव बदल रहे हैं न प्रधान ही खुश हैं क्योंकि इस अनुपात में प्रधान का भत्ता न के बराबर है।

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